खोडियार माँ छंद

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.           ॥खोडियार वंदना॥
.             छंद : वीर छप्पय
.      रचना: दिव्यराजसिंह सरवैया

खमकारी खोडल मात, सात भगिनी सुखकारा,
व्रसाव वरद वरसात, जात चारण कुल धारा,
धर धर पर अवतार, तार तव बाळक तारा,
कर करुणा करतार, मार भवपाप ज मारा,
चारण सत मामड मिणल, भेर मेरखिय भ्रात।
सदा दिव्य सहाय रहो, संगाथ बेनि सात॥..(1)

सरकंत सुगंधि समीर, नीर धरे निर्मळ वहता
भभकेय भेळीयो शीर, धीर रवि झाँखप धरता
खनखन खंजरी खणक, डणक देय डाक बजता
राग रागिणी रणक, झणक झांझरी झणकता
सरवैयानी सहायक, अयावेज रा आप,
ध्याने दिव्य तव धरे, सभी हरो संताप..(2)

रिपु बढ़े जग राळ, त्राळ दै खोड़ी त्रट्टके,
वदन बने विकराळ, काळ बण असुरा कट्टके,
सटके शेष दिगपाळ, झाळ व्योमे चहु झट्टके,
कीधा दैत कंकाळ, गाळ धोध रगता गट्टके,
अवकाशे थी अवतरी, दैता दळवा काज,
दिव्य आप चरणे रहे, रख लाखेणी लाज..(3)

खोडल खेले रास, खास नवलाखे भाळी,
आवड़ संगे आस, पास तोगड़ ले ताळी,
होलबाई हुलास, वास जोगड़ जोराळी,
सांसइ करती हास, भासे बिजबाई भेटाळी,
चौद भुवन घूँघर करी, कळी रविचंद कान।
आभ भेळीयो ओढ़ी, सातेय दिव्य शान॥..(4)
– दिव्यराजसिंह सरवैया कृत

Divyrajsinh Sarvaiya (Dedarda)

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