सवाजी गोहिल, Savoji Gohil

Standard

image

~~ मोत साथे प्रितडी ~~

=== गारीयाधार गाम. सवाजी गोहिल नाम. 18 ज वरसनी उमर छे. पण मरदनु फाडियु केवाय हो।

मर्द शिष वर नवे, मर्द बोली पहेचाने।
मर्द खिलावे खाय, मर्द चिँता नहि माने।
मर्द लेय और देय, मर्द को मर्द बचावे।
गहरे साकर काम, मर्द को मर्द हि आवे॥

=== 18 ज वर्षनी उमरे गारीयाधारनी गादीनी माथे आव्या छे। ऐमा मामा महेमान छे अने शियाळानो समय छे. मामानी वृद्ध उँमर, मामाने श्वास अने उधरसनी तकलीफ, ऐमने उधरस बहु चडी।

द्रगद्रग नहि तेज देख जब डगमग, पग पग मग मग अलग परम् ।
जग जग मुखदँत बचन जब भगभग, जम अनुचर लगभग जग रम् ।
तळतळ की खबर लेत हरी भुतल चल सह पंथ जनम सुधरे ।
जटपट मन छेद कपट धज खटपट काळ नफ्फट शिर झपट करे ॥

=== एटले सवाजी गोहिले एटलु किधु के, ” मामा! माणस वृद्ध थई जाय, आटला दर्दथी भेराय जाय, तोय माणसने जीवतर व्हालु लागतु हशे? मरी नो शकाय?”

मामा :- के भाणुभा! खोळियामांथी प्राण काढी नाखवा ए बहु अघरी वात छे।

सवाजी :- के मामा! ए बिजा माटे अघरी वात होय, राजपुतो माटे नहि। प्राण खोणियामाँथी काढता एक घडीनी वार नो लागे।

मामा :- कुँवर ! जुवानीनु अभिमान छे बाप ! खाली वातु थाय।

सवाजी :- तो साँभळी ल्यो मामा! मारी उमर केटली छे?

मामा :- भाणुभा, 18 वर्ष थ्या तमने।

सवाजी :- के मामा! हु सवोजी गोहिल प्रतिज्ञा लव छु जाव। के आजथी 25मा वरसे मारा खोळिया मा प्राण नहि राखु।

=== वातनी बधायने खबर पडी। डंको वागी ग्यो गोहिलवाडमा के “सवाजी गोहिले प्रतिज्ञा लीधी, प्रतिज्ञा लीधी, 25मा वरसे पोताना प्राण त्यागी देवाना छे।” ध्रुजी ऊठ्यु आखु काठियावाड हो भाई ।

=== सवाजीना बेनबाने खबर पडी के पोताना वीरे 25 ज वर्ष जीववानी प्रतिज्ञा लीधी छे। वेलडुं जोडावी अने गारियाधार आव्या। वीरना औवारणा लीधा ने बेननी आँखमाथी दड दड दड आँसुडानी धार थई अने सवाजीने किधु के, ” भाई! आज हु तारी पासे काँईक माँगवा माटे आवी छु, माँगीश ए आपीश?”

सवाजी :- अरे बोल बोल बेन! तारा मोढामांथी शब्द नीकळे ने सवोजी माथु नो उतारी दे तो हु राजपुत नही। तारे मने आवु पुछवु पडे?

बेनबा :- वचन आप वीर।

सवाजी :- जा बेन! तने वचन दिधु, मारी बोनडी माँगशे ए आपीश।

बेनबा :- वीर एक विचार कर, दुनियामां कोई एवी बेन होय के पोताना बापना टींबाने उज्जड थाता जोई शके?
ते 25 वर्ष जीववानी प्रतिज्ञा लीधी छे। बाप! हजी तारा लगन नथी थ्या। तु जे जनेताने धावण धाव्यो ईज जनेताने हु पण धावण धावी छु, हु य राजपुताणी छु, हु य क्षत्रियाणी छु। तने मरता नथी रोकती, पण एक वचन मने आप के तारा जीवतरना 5 वर्ष मने दई दे, बाप! 5 वर्ष वधारे जीव।
तारा लगन करीये ने एकादो कुँवरडो खेलतो होय। 30मा वरसे मरवानी तने छुट आपु छु। जा बाप! एक जीवतरना 5 वर्ष मने दई दे।

ने खड खड खड सवाजी गोहिले दाँत काढ्या ने किधु के, “बेन, तारा 5 वर्ष जो वधारे जीवु ने तो बेन ने आप्यु नो केवाय पण जीवतर उछीनु लीधु केवाय। माराथी बेननु नो लेवाय।
पण जा बेन! तने 5 वर्ष दई दिधा, मे 25 वर्ष जीववानी प्रतिज्ञा करी ती, जा हवे 20 ज वर्ष जीविश।

=== 20मा वरसे खोळिया मांथी प्राण काढी नाखवानी प्रतिज्ञा लईने 18 ज वर्षनो राजपुतनो दिकरो बेसी ग्यो, भाई।
बेने घणो समजाव्यो, कगरी-रोई पण मान्यो नहि। वई गई बेनडी पाछी।

=== पण आवा जे टेकिला माणसो होय छे एनी परमात्मा परीक्षा बहु करे। सवाजी गोहिलनी सामे कोई वेर बाँधतु नथी, कोई सामे मरवा तैयार नथी।

पछीतो कुवानी ऊपर लाकडाना पाटिया राखीने एनी उपर घोडा खेलवे के जो घोडो डाब छाँडी जाय तो आपघात य नो कर्यो केवाय अने प्रतिज्ञा य पुरी थई जाय। पण बधुय निरर्थक।

=== 2 वर्षने जाता वार नो लागी। 20मा वर्षनो छेल्लो दि. सवारनो पहोर, जो आ दिवसनो सूर्य आथमी जाय तो तो प्रतिज्ञाभँग थाय।

=== मुरलीधर महाराजने प्रार्थना करे छे, “ऐय मुरलीधर महाराज! हे बाप! तु तो गोहिलोने तेगे ने देगे बेसवावाळो छो।
“एय जोगमाया खोडियार! एय नवलाख लोबळियाळी! माँ आजे वहारे आवजे।”

आर्तनाद उपाड्यो भाई। त्या तो जोगमायायु आ वेण केम साँभळी शकै।

=== ज्या नजर करी त्या तो काठी ओना हिँगळोकिया माफा(वेलडा) व्या आवे छे। माफा दरबारगढमां लई लेवामा आवे छे।
सवाजी जईने काठियाळीयु मळ्या छे, “बेन! बापा नारायण! मुँझाशो मा हो। तमारो वीर छु, पण प्रतिज्ञा लीधी ती एटले माफा वाळवा पड्या, माफ करजो बापा!”

=== अने आ बाजु काळजाळ काठीओनी फौज चडी हो भाई।

गडे डाकरा अवाज चँडी त्रंबाळा आकरा गाजे।
तोप हुसा करा बिकण हाकरा त्रेसंग।
गोम धुवा करा पीठ अतोळ भाखरा गाजे।
सँग्राम साकरा बेळे ठाकरा जेसंग॥

एवा काळजाळ काठीओनी फौज “मारो, मारो” करती गारीयाधारना पादरमां 1000 काठीओ आवीने उभा रह्या हो भाई।

=== सवाजी गोहिल एकला, गारियाधारनी फौजने ना पाडी छे के, “कोईए चडवानु नथी, हु सवोजी एकलो चडु छु, काठीयोना पाळनी सामे।”

=== देका रा-पडकारा थ्या, सवाजीए काठीओने एक विनँती करी के, “हु मरवा ज आव्यो छु, लडवा ज आव्यो छु, पण तमे 1000 जणा छो ई 500-500ना बे कटक करी नाखो अने वच्चेथी मारे घोडली नाखवी छे, सामसामी तलवारु तोळीने उभा रो।
तमारी बेनु-दिकरीयु ने मारा दरबारगढमा मे मारी माँ नी जणी बेनुनी जेम जो राखी हो य तो तमारी तलवार चलावो, वच्चेथी घोडी नाखु पण तमारी एक पण तलवार मने नहि अडे।”

=== काठीओए विनँती स्वीकारी बे कटक कर्या। सवाजी ए भगवान भोळाने याद कर्यो अने काठीओए भगवान सूरज नारायण ने याद कर्यो।
हाकला-पडकारानी वच्चे बाकाझिँक बाकाझिँक बाकाझिँक बोलवा माँडी। तलवारुनी तालियु मँडी बोलवा अने बागळधा बागळधा बागळधा बागळधा एम केवाय छे के मुरलीधर महाराजनु ने खोडियारनु नाम लई घोडीने नाखी पण एमनम नलोयो नीकळी ग्यो। एक तलवार काठीनी सवाजीने अडी नहि।

=== सामे छेडे जई किधु काठियुने के, ” हवे थाव भाईडा।”

=== अने एम केवाय छे के ई 1000 काठीने खतम करी 20मा वर्षनी साँजे सवाजी गोहिले खोळियु खाली करी नाख्युतु।

एनु नाम जीवतरनु मुल्य केवाय, राजपुताई केवाय, क्षात्र धर्म केवाय।

Photo : Palitana Thakor Saheb

Divyrajsinh Sarvaiya (Dedarda)

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s