कच्छ, Kutch/Kachchh

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धन्य हो धन्य हो कच्छ नी धरणी
विकट वन डुंगरा विकट रण वाट ज्यां विकट भुज कोट वंको भुजंगी
खेलता खडग ना खेल रण घेलडा
विकट रणवीर वीरत्व रंगी शुर सतीओ तणा शौयॅ थी सोहती प्रेम पियुष नां पान करणी भारती मात ने खोळले खेलती
धन्य हो धन्य हो कच्छ नी धरणी
संत सुता भला भकत जे भोम मां पीर पोढया जहां ठामठामे डुंगरे डुंगरे देवी नी देरीओ खांभीओ खोंधनी गामगामे वाछरो वीर ने वीर पाबू तणी वीरता भूमि ना भार धरणी
भारती मात ने खोळले खेलती
धन्य हो धन्य हो कच्छ नी धरणी
संत जेसल अने सती तोरल तणी घरोघर गुंजती दिव्य वाणी भकत मेकरण लालियो मोतियों मूक सेवक बन्यां मूक प्राणी कैंक कविओ तणा भव्य उर भावनी ज्यां वही सतत साहित्य सरणी
भारती मात ने खोळले खेलती
धन्य हो धन्य हो कच्छ नी धरणी
मलपती महालती फलंगे चालती सांढणीओ तणां झुंड फरता पवन थी चमकता घोडला धमकता धमकता धरण पर पाय धरता ढळक्तती ढेल शी रणक्तती माणकी थनगती कोंतलो कनकवरणी भारती मात ने खोळले खेलती
धन्य हो धन्य हो कच्छ नी धरणी
बपैया बोलता मोरला डोलता कोकिला लोल कल्लोल करती कैंक शुक सारीका कुंजनी मालिका उडती कलरवे आभ भरती अमित उतावळी सभर नदीओ कंइ नाचती राचती नीर झरणी
भारती मात ने खोळले खेलती
धन्य हो धन्य हो कच्छ नी धरणी
सरवरो छलकातां खळळखळ खळकतां नीर नहेरो तणां गेल करता खेतरो हलकतां कृषिवलो मलकतां अन्न अंबार भंडार भरतां जलधिजलराज तुज पाद प्रक्षालतो धूलि तव तरण तरणी भारती मात ने खोळले खेलती
धन्य हो धन्य हो कच्छ नी धरणी

( रचियता दुलेराय काराणी)

Divyrajsinh Sarvaiya (Dedarda)

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