पार करा परमार Parmar

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अश आपे क़ै आधपति, दे गज कै दातार।
सावज दे मुं सावभल, पार करा परमार॥

जमी दान के दे जबर, लिलवदु लिलार।
सावज दे मुं सावभल, पार करा परमार॥

क्रॉड़पसा के काव्यन्द, ने लखपसा लखवार।
सावज दे मुं सावभल, पारकरा परमार॥

दोढा रंग तूने दैउ, सोढा बुद्धि सार।
मोढ़े उजड़े दे मने, पारकरा परमार॥

सावज भारी साम्हो, भड़क्या केमहि भाग।
पांथु पाछा पाग, भरवा न घटे भड़ जने॥

चाचे सिंह समीपियो, केसर झाल्यो कान।
हवे रमतो मलये रान, पोच्यो परमारा धनी॥

Divyrajsinh Sarvaiya (Dedarda)

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