Daily Archives: July 29, 2015

चाणक्य के 15 अमर वाक्य

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चाणक्य के 15 अमर वाक्य | सीखें
और सीखयें |

1)दुनिया की सबसे बड़ी ताकत पुरुष का
विवेक
और महिला की सुन्दरता है।

2)हर मित्रता के पीछे कोई स्वार्थ जरूर
होता है, यह कड़वा सच है।

3)अपने बच्चों को पहले पांच साल तक खूब
प्यार करो।
छः साल से पंद्रह साल तक कठोर अनुशासन
और संस्कार दो।
सोलह साल से उनके साथ मित्रवत
व्यवहार करो।
आपकी संतति ही आपकी सबसे अच्छी
मित्र है।”

4)दूसरों की गलतियों से सीखो
अपने ही ऊपर प्रयोग करके सीखने को
तुम्हारी आयु कम पड़ेगी।

5)किसी भी व्यक्ति को बहुत
ईमानदार नहीं होना चाहिए।
सीधे वृक्ष और व्यक्ति पहले काटे जाते हैं।

6)अगर कोई सर्प जहरीला नहीं है
तब भी उसे जहरीला दिखना चाहिए
वैसे दंश भले ही न हो
पर दंश दे सकने की क्षमता का दूसरों को
अहसास करवाते रहना चाहिए।

7)कोई भी काम शुरू करने के पहले तीन
सवाल अपने आपसे पूछो…
मैं ऐसा क्यों करने जा रहा हूँ ?
इसका क्या परिणाम होगा ?
क्या मैं सफल रहूँगा?

8)भय को नजदीक न आने दो अगर यह
नजदीक आये
इस पर हमला कर दो यानी भय से भागो
मत
इसका सामना करो।

9)काम का निष्पादन करो, परिणाम
से मत डरो।

10)सुगंध का प्रसार हवा के रुख का
मोहताज़ होता है
पर अच्छाई सभी दिशाओं में फैलती है।”

11)ईश्वर चित्र में नहीं चरित्र में बसता है
अपनी आत्मा को मंदिर बनाओ।

12)व्यक्ति अपने आचरण से महान होता है
जन्म से नहीं।

13)ऐसे व्यक्ति जो आपके स्तर से ऊपर या
नीचे के हैं
उन्हें दोस्त न बनाओ,
वह तुम्हारे कष्ट का कारण बनेगे।
समान स्तर के मित्र ही सुखदायक होते हैं।

14)अज्ञानी के लिए किताबें और
अंधे के लिए दर्पण एक समान उपयोगी है।

15)शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है।
शिक्षित व्यक्ति सदैव सम्मान पाता है। 
शिक्षा की शक्ति के आगे युवा शक्ति और
सौंदर्य दोनों ही कमजोर है।

Divyrajsinh Sarvaiya (Dedarda)

आज तरछोड मा जोगमाया ! Dula Bhaya Kag

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छंद  झुलणा

भान बेभानमां मात ! तुंजने रट्या,
              विसारी बापनुं नाम दीधुं;
चारणो जन्मथी पक्षपाती बनी,
          शरण जननी तणुं एक लीधुं,
तें लडावी घणां लाड मोटा कर्या,
         प्रथम सत्काव्यनां दुध पायां,
खोळले खेलव्यां बाळने मावडी,
       आज तरछोड मा जोगमाया !

रास रमती हती अम तणी जीभ पर,
     झणण पद नूपुर झणकार थाता;
सचर ने अचर सौ मुग्ध बनतां हतां ,
             ताल दई संगमां गीत गातां.
नर नराधीश जगदीश रीझ्रया हता,
      अम तणां ए ज झरणां सुकायां;
खोळले खेलव्यां बाळने मावडी,
         आज तरछोड मा जोगमाया !

देशभक्ति तणारण मरण मोक्षना,
      पाठ क्षत्रीने अघरा पढाव्या;
रंक रक्षण तणां दुष्ट भक्षण  तणां,
आकरा पाण तेगे चडाव्या
लग्न वरमाळ काढी लडाव्या हता,
         आज निरवीर्यना गुण गाया;
खोळले खेलव्यां बाळने मावडी,
        आज तरछोड मा जोगमाया !

आत्म-अरपण तणा प्रथम भुव भारते,
                 चारणे कंठथी सूर छेड्या;
लाखनां लोहीनी धार अटकाववा,
            चारणे आपनां लोही रेध्यां.
सत्य आग्रह तणा उपासकआदिथी,
          स्वतंतर जीवनना गुण गाया.
खोळले खेलव्यां बाळने मावडी,
         आज तरछोड मा जोगमाया  !

सत तणा स्वांग रण भोम रंगमे’लमां,
               पे’रीने असतनादांत झेर्या,
अंबिका तुज तणा ए ज पुत्रो अमे,
        असतना शामळा पाठ पे’र्या.
अंध लंपट अने नफट छोरु बने.
           मात छोडे नहि तोय माया;
खोळले खेलव्यां बाळने मावडी,
        आज तरछोड मा जोगमाया  !

जगत सेवा तणां काव्य ललकारीए.
               झूंपडे झूंपडे गीत गाईयें,
भीख साहित्यनी मागशे क्षत्रियो,
            देव एवा फरी वार थाईयें.
‘ काग ‘ खेडुतनी खेडी धरणी परे,
           मे’र वरसादनी वाट माया;
खोळले खेलव्या बाळने मावडी,
      आज तरछोड  मा जोगमाया  !

कवि काग बापु

Divyrajsinh Sarvaiya (Dedarda)

कांकरी – दुला भाया काग Dula Bhaya Kag

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कांकरी
        (झूलणा छंद)

कुळ रावण तणो नाश किधा पछी
ऐक दी रामने वहेम आव्यो
मुज तणा नामथी पथर तरता थया
आ बधो ढोंग कोणे चलाव्यो ?
ऐ ज विचारमां आप उभा थया
कोईने नव पछी साथ लाव्या
सवॅथी छुपता छुपता रामजी
ऐकला उदधिने तिर आव्या…

चतुर हनुमानजी बधुंय समजी गया
चालीया श्री रधुनाथ पे’ले 
रामनो दास ऐ वेरी ना वतनमां
रामने ऐकला केम मेले ?
तीर सागर तणे विर उभा रह्या
कोकथी जाणीये होय डरता
हाथमां कांकरी ऐक लीधी पछी
चहु दिशे रामजी नजर करता…

चोरना जेम हनुमान संताईने
वृक्षनी धटाथी निरखे छे
चितमां कपिने खूब विस्मय थयुं
आ रधुनाथजी शुं करे छे ?
फेंकता कांकरी तुतॅ तळीये गई
तसगरे जाणीये होय लुंट्या
राम पोता थकी खूब भोंठा पड्या
शरमना शेरडा मुख छूट्या…

चरणमां जई कपि हाथ जोडी कहे
नाथजी ! आ मती केम आवी ?
हाथ जेनो गह्यो तेहने फेंकतां
आपना बिरदनी शरम ना’वी ?
तारनारा बनी निरमां धकेलो
माफ करजो करी भूल भारे
तमे तरछोडशो तेहने नाथजी !
पछी त्रीलोकमां कोण तारे ?…
– दुला भाया काग

Divyrajsinh Sarvaiya (Dedarda)

कहे राधे प्यारी में बलिहारी गोकुल आवो गिरधारी

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आषाढ ऊच्चारं, मेघ मलारं, बनी बहारं जलधारं .
दादुर डकारं , मयुर पुकारं, सरिता सारं विस्तारं .
ना लही संभारं , प्यास अपारं , नंद कुमारं निरधारी .
कहे राधे प्यारी, मैं बलिहारी , गौकुळ आवो गीरधारी !!

श्रावण जळ बरसे , सुन्दर सरसे , बादळ वरसे अंबर से .
तरवर गिरवरसे, लता लहर से , नदियां सरसे सागर से .
दंपति दुख दरसे , सैज समरसे , लगत जहर से दुखकारी .कहे राधे प्यारी, मैं बलिहारी, गौकुल आवो गिरधारी !!

भाद्रव भरिया, गिरवर हरिया, प्रेम प्रसरिया तन तरिया .
मथुरा में गरिया, फैर न फरिया, कुब्जा वरिया वश करिया.
ब्रजराज बिसरिया,काज न सरिया,मन नहीं ठरिया हुं हारी.
कहे राधे प्यारी, मैं बलिहारी, गौकुळ आवो गिरधारी !!

आसो महिनारी, आश वधारी, दन दशरारी दरशारी .
नव निद्धि निहारी, चड़ी अटारी, वार संभारी मथुरारी .
वृषभानु दुलारी, कहत पुकारी विनवीये वारी वारी .
कहे राधे प्यारी, मैं बलिहारी, गौकुळ आवो गिरधारी !!

कहुं मासं काती, तिय मदमाती, दिप लगाती रंग राती .
मंदिर महलाती, सबे सुहाती, मैं हरखाती जझकाती .
बिरहे जल जाती, नींद न आती, लखी नपाती मोरारी .
कहे राधे प्यारी, मैं बलिहारी, गौकुळ आवो गिरधारी !!

मगसर शुभ मासं, धर्म प्रकाशं, हिये हुल्लासं जनवासं .
सुन्दर सहवासं, स्वामी पासं, विविध विलासं रनिवासं .
अन्न नहीं अपवासं, व्रती अकाशं, नहीं विश्वासं मोरारी .
कहे राधे प्यारी, मैं बलिहारी, गौकुळ आवो गीरधारी !!

पौषे पछताई, शिशिर सुहाई, ठंड लगाई सरसाई .
मन मथ मुरझाई, रहयो न जाई, बृज दुखदाई वरताई .
शुं कहुं समझाई, वैद बताई, नहीं जुदाई नर नारी .
कहे राधे प्यारी, मैं बलिहारी, गौकुल आवो गिरधारी !!

माह महिना आये, लगन लखाये, मंगळ गाये रंग छाये .
बहु रैन बढाये, दिवस घटाये, कपट कहाये वरताये .
वृज की वनराये, खावा धाये, वात न जाय विस्तारी .
कहे राधे प्यारी, मैं बलिहारी, गौकुळ आवो गिरधारी !!

फागुन प्रफुल्लितं, बेल ललितं, कीर कलीतं कौकीलं .
गावत रस गीतं, वसन्त वजीतं, दन दरसीतं दुख दिलं .
पहेली कर प्रीतं, करत करीतं, नाथ अनीतं नहीं सारी .
कहे राधे बलिहारी,मैं बलिहारी,गौकुळ आवो गिरधारी!!

मन चैत्र मासं, अधिक ऊदासं, पति प्रवासं नहींपाये .
बन बने बिकासं, प्रगट पलासं,अंब फळांसं फल आये.
स्वामी सहवासं, दिये दिलासं, हिये हुल्लासं कुबजारी .
कहे राधे प्यारी, मैं बलिहारी, गौकुळ आवो गिरधारी !!

वैशाखे वादळ, पवन अप्रबळ,अनल प्रगट थल तपति अति.
सौहत कुसुमावल, चंदन शीतल, हुई नदियां जळ मन्द गति.
कियो हमसे छळ, आप अकळ कळ, नहीं अबळा पत पतवारी .
कहे राधे प्यारी, मैं बलिहारी, गौकुळ आवो गिरधारी !!

जेठे जगजीवन, सुके बन बन, घोर गगन घन चढत घटा.
भावत नहीं भौजन, जात वरस दन, करत प्रिया तन काम कटा .
तड़फत ब्रज के जन, नाथ निरंजन, दिया न दरशन दिलधारी .
कहे राधे प्यारी, मैं बलिहारी, गौकुळ आवो गिरधारी !!

रचयिता : चारण पींगळशी पाताभाई नरेला

Divyrajsinh Sarvaiya (Dedarda)

रखोपा रवराय राखे

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दाम हाम सुख दैवणी.कंचन करणी काय.
जगपर थारी जोगडा.रखवाळी रवराय.|| 01||

आरत नादे आवणीं.घाबळ वाळी घाय.
जरी रुक्या वण जोगडा.रखवाळे रवराय.||02||

उठतां वत यादी करी.पडे नित्य जो पाय.
जीवन उजाळे जोगडा.रखवाळी रवराय.||03||

ताप हरे मन तन तणां.सितल रखे सिर साय.
जो भज भावे जोगडा.रखवाळी रवराय.||04||

जो रचना तुज जोगडा.गरवा सादे गाय.
हजी करे मां हाकला.रखवाळी रवराय.||05||

   🚩🚩🚩🚩🚩🚩

नवेलख लोबडी ओढती ओपती.थोपती घरम अघरम उथापे.
रुंड दळ चुंड चामुंड बण चोळती.घोळती अहर रत झपट घापे.||
जण्यों जप जोगडो जपंतो जणेता.प्रणेता पसारी आव्य पांखे.
दान जोगी दता भाव चडीयो भणे.रखोपां आई रवराय राखे. ||06||

अगम तुं ईशरी असुर आरोगणी.जोगणीं अमों तोळा जणेंला.
रसण पर रटंता तोतरा जप तवां भवां नव वेद कोई भणेंला.||
भेळीया घारणीं भवो दुख भंजणी.व्यंजणी अखर अम जीभ भाखे.
दान जोगी दता भाव चडीयो भणें.रखोपां आई रवराय राखे.||07||

वावडो शियाळु वात ना व्रजाळी.प्रजाळी पाप रव दीयण पंडी.
घरा वागड महीं घरम री घारणी.चारणी वडेरी तुंह्ज चंडी.||
जगत उद्धारणी अहर संवहारणी भवां जप चार दस भुंवण भाखे.
दान जोगी दता भाव चडीयो भणें रखोपां आई रवराय राखे.||08||

झणंके झांझरा ठमंके ठाहरा रास कईलास लग रंग रेले.
समद ढंढोळवा राखहां रोळवा खडग लै खलक मां खेल खेले.
कचेरी भुज्जरी गांण से गुज्जरी नवे नव नाळीये नाद नाखे.
दान जोगी दता भाव चडीयो भणें रखोपां आई रवराय राखे.||09||

भुवा नोंघा तणें रमत भेळी रमे भुज्ज ईक तुज्ज दरीयांण दंडी.
शाह जगडु तणां वांण नी तारणी चारणी चतु जुग तुज चंडी.
हारणी कहट तुं मारणीं दहट तुं रहट कर रदय मह रेम राखे.
दान जोगी दता भाव चडीयो भणें रखोपां आई रवराय राखे.||10||

ठेह रा ठमंके धरा पड धमंके चमंके व्रमंडा चौद डोले.
नेवरां झणंके रणण बज रमंके खणंके चुड मह भाग खोले.
भ्रमांडे भमंती राहडा रमंती जमंती अहर ना रगत चाखे.
दान जोगी दता भाव चडीयो भणें रखोपां आई रवराय राखे.||11||

सांज ने सवारे गुगळ रा धुप दै उगमणे आसणे नैण मुंदे.
सकळ मन कामना पुर्ण करती सगत वांझीया खोळले बाळ खुंदे.
असा परचा दीयण आई तुं ईशरी नीशरी नवय धर नजर नाखे.
दान जोगी दता भाव चडीयो भणें रखोपां आई रवराय राखे.||12||

पाठ तव प्रेमसे नीत करे नेम से रेम से रदय री रीझ लावे.
चंडीका चारणी करम सत कारणी धारणी सकळ मन धीज धावे.
ठाम घर हाम भर दाम रुप दैवणी व्योम धर सुरज ने चांद साखे.
दान जोगी दता भाव चडीयो भणें रखोपा आई रवराय राखे.||13||

जीव ने शिव गण जाप तोळा जपे तपे तोळा बळे नखत तारा.
कंडारि भेळीये सुर कोटी भवां धवल जळ गंग नी धोध धारा.
सुरग पाताळ भु सकळ तुजने नमे दरद हरणी कही देव दाखे.
दान जोगी दता भाव चडीयो भणें रखोपां आई रवराय राखे.||14||

मात ममताळ तुं मळी भाग्ये मलक झलक तव फलक लग तेज फोरे.
मलकते वदन ईक पलक पापो जळे चळे नह वचन नव घेन घोरे.
धन्य वागड भले धोम हो धखंतो नीर स्रोवर हीयां हेम नाखे.
दान जोगी दता भाव चडीयो भणें रखोपां आई रवराय राखे.||15||

जाय छे धरम ई जाळवो जोगणीं भोगणी वात मां नात भागी
अहम ईरशा कटो मान भेरे मया दया री जोगणीं देख जागी.
खुंदवा खोळला पधारो खलक मां मलक मां वधारो लाज लाखे
दान जोगी दता भाव चडीयो भणें रखोपां आई रवराय राखे.||16||

गगन गुंजावती आई तुं आवती धावती धाबळी शिस्श धारी.
सजह धा सुंणेतां जरी मां जणेतां पुगे तुं प्रणेता बार्य बारी.
आपीयां वचन तें याद अंबा अमुं हाथ वंदे पदे माथ नाखे.
दान जोगी दता भाव चडीयो भणें रखोपां आई रवराय राखे.||17||

अणुं ये अणुंमां वास विस्वे हरी केहरी बणीं तुं अंब ओढे.
कालीका ज्वालीका डमत हरडाक तुं पाकथळ हींगळा नाम पोढे
भोम तुं गगन तुं अगन तुं नीर तुं तेज तुं विचरती वायु वाखे.
दान जोगी दता भाव चडीयो भणें रखोपां आई रवराय राखे.||18||

हिया ना भाव पे करंती हाकला डाकला पडां सम दैत ध्रुजे.
थाकला पाकला सकल आ सारणां पारणां बंधणीं मात पुजे.
अनल हक आई तुं ईश आलेखणीं लेखणीं चारणां नमण लाखे.
दान जोगी दता भाव चडीयो भणें रखोपां आई रवराय राखे.||19||

रुचा ना रंग मां रुशी रुग वेदना वेदना काटणी मात वंदे.
यजु ने अथव मां ताम धामे तवां  साम वेदे तुने गाई छंदे.
पुरांनो कुरानो हदीस के ईश मां भवां कीं जोगडो भेद भाखे.
दान जोगी दता भाव चडीयो भणें रखोपां आई रवराय राखे.||20||

चहु जग चारणी आप उद्धारणी कारणी करम नी मात कामा.
विकट विध्दारणी धरम नी धारणी तारणी रवेची नाम तामा.
जाप तोळा जपे नित्य जो नरणमां चरणमां अमी नां घुंट चाखे
दान जोगी दता भाव चडीयो भणें रखोपां आई रवराय राखे.||21||

सारदा बणीं तुं रचावे आरदा रदा ने रसण तुं मात राजे.
बणीं बेबाकळी वार करती वटे रटे जो कुंख नां कहट काजे.
जण्यांने जखमजो जगतमां जडेतो जनेता  सहजपण केम सांखे
दान जोगी दता भाव चडीयो भणें रखोपां आई रवराय राखे.||22||

व्यसनी थी वेगळा रहे सउ वालथी धीडी बण जोगणीं जनम धारो.
आई तुं अवतरी अवगता आतमा तेर पेढी तणां मात तारो.
कुंखना ने कबु कहट नावे कजु वेग थी श्राप ना बार वाखे
दान जोगी दता भाव चडीयो भणें रखोपां आई रवराय राखे.||23||

अखील ब्रहमांड आ आई ना उदरमां भुदरमां चारणीं मात भाळी.
चंद्र भागा महं म्माय हींगोळ तुं  कोप दुरगा बणीं तुंज काळी.
द्वैत आद्वैत ना उकेली  अंचळा भवां हर रुप मे ऐक भाखे.
दान जोगी दता भाव चडीयो भणें रखोपां आई रवराय राखे.||24||

वेद मां भेद ना छेद नी वातडी पातडी जीभरो केम पामुं.
ब्रह्म तुं शिव तुं जीव तुं तत्व तुं सत्व तुं शबद मां केम सामुं.
तुंही तुं  तुंही तुं सरव व्यापी रही देखतां अवनवां द्रश्य दाखे.
दान जोगी दता भाव चडीयो भणें रखोपां आई रवराय राखे.||25||
– कविश्री जोगीदान गढ़वी

Divyrajsinh Sarvaiya (Dedarda)

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को श्रद्धांजलि

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जुकी जुकी ने जोगडो. सो सो करुं सलाम
फोरम दई ग्यो फलक लग. करुणा तणीं कलाम

पाक्यो साचो पाक तुं. अदकेरो ईसलाम
जन्नत पोग्यो जोगडा. कलमा समो कलाम

उजवळ ऐवो आतमा. रहीम भळ्यो तुं राम
जनत नसी थ्यो जोगडा. करीयें नमन कलाम

कर्यो नतो तें कोयदी, ऐके घडी अराम
जनम भुमि नां जोगडा. करतो काम कलाम

जातां अबदुल जोगडा. दलडे लाग्यो डाम
मुठी वडेरो मानवी. क्यां अब मळे कलाम
– कवि श्री जोगीदान गढ़वी

Divyrajsinh Sarvaiya (Dedarda)