Monthly Archives: August 2015

दास सतार के भजन bhajans of Daas Satar

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                   (1)
भजन करी लेने ओ गुणीयल ज्ञानी,
जो जो जाती रहेशे आ जुवानी ….भजन करी लेने …

भजने नाम प्रभु नु प्यारु, भक्ति विना दीसे अंधारु,
साचुं मानी लेने कह्यु मारुं…भजन करी लेने …

समजु सानमां समजी जाए, मुरख होय ते गोथा खाशे,
अंते तेनी फजेती थाशे …भजन करी लेने …

आव्यु हरी भजवानु टाणुं, गाने प्रभु नाम नु गाणुं,
साथे बांधी ले साचुं ए नाणुं….भजन करी लेने …

मुरखा मनमां बहु मलकाय,धन ने देखीने छलकाय,
अंते खाली ते हाथे जाय …भजन करी लेने …

तुं तो शेठ नो छे वाणोतर, तारा शेठ छे परमेश्वर,
भक्ति करवा राख्यो छे तने नोकर …..भजन करी लेने …

कमाणी एवी करीने जईए, मांगे हीसाब तो पुरो दईए,
त्यारे शेठ ना वाला थई रहीए ….भजन करी लेने ….

भाई सानमां समजी जवुं, नित्य हरीना गुणने गावुं,
तारे दुर ना देशे छे जवु….भजन करी लेने …

भक्ति जे कोई करशे भावे, तेना जनम मरण मटी जावे,
” सतार ”सत्य कही समजावे …..भजन करी लेने ….

                   (2)
भजन बीन नर है पशू के समान,
जैसो फिरत है ढोर हरायो,
खात फीरत है घास परायो,
अपने धनी को नाम लजायो,
मुंढ मुरख मस्तान….भजनबीन…

कोल बचन दे बहार आयो,
आकर लोभ में चित लगायो,
धीकधीक हरको गुणनहीं गायो,
बे बचनी नादान ….भजन बीन

अज्ञानी क्या फल को पावे,
तेरी मेरी में जनम गुमावे,
हिरला हाथ फिर कहांसे आवे
निकल गयो जब प्राण ….भजन बीन..

प्रेम से हर का जो गुण गावे,
ज्ञानी होकर ध्यान लगावे,
” दास सतार ” वो ही फल पावे
जो भजते भगवान …भजन बीन …
– दास सतार
(3)
सुख और दु:ख में आनंद रहेवे
हरदम हरगुण गावे
साधु वो नर हमको भावे…टेक

परनारी परधन को त्यागे, सतकी रोजी खावे,
तनमन और बचन सें कोइ, जी को नांही दुभावे. …साधु वो…

करे सेवा संसार की उनको, साची राह दिखावे,
धर्म करतां धाड आवे तो, हिंमत हार न जावे. …साधु वो …

परदु:ख भंजन होकर रहेवे, गुरू गोविंद गुण गावे,
दास सत्तार गुरू गोविंद मिलकर, काल को मार हठावे … साधु वो…

रचना :- दास सत्तार
टाइप :- सामरा पी गढवी

History & Literature

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मात्र दो राजपूत वीरो ने दिल्ली दरबार डरा दिया, History Of two brother brave Rajputs

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“हेला मारे खेजड़ी,सुण पंथी सन्देश
बिन माथे अरि बाढ़ण,निपजे म्हारो देश “

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Rajputi

बात सन 1656 के आस-पास की है, उस वक़्त दिल्ली में राज था शाहजहा का और मारवाड़ की गद्दी पर बैठे थे महाराजा गज सिंह प्रथम, एक दिन दिल्ली में दरबार लगा हुआ था, सभी उमराव बैठे हुए थे, तभी शाहजहा के मन में विचार आया की मेरे दरबार में खानों की बैठक 60 और राजपूतो की बैठक 62 क्यों , दो बैठक राजपूतो की ज्यादा क्यों है, सो उसने ये सवाल सभा में सब से पुछा, कोई जवाब नहीं आया,तभी दक्षिण के सूबेदार मीरखानजहा खड़ा हुआ “हजूर, राजपूतो की संख्या हम से दो ज्यदा इसलिए है क्योकि उनके दो ऐसे काम है जो हम नहीं कर सकते है, एक तो वो सर कटने के बाद भी लड़ते है और दूसरा उनकी पत्नी उन के साथ जिंदा जल के सती होती है” शाहजहा को बात जची नहीं बोला “में नहीं मानता इस को साबित कर के दिखाओ तो मानु”, जोधपुर महाराजा गज सिंह भी दरबार में थे, उनको ये बात अखरी, सभा ख़तम हुए तो वो सीधे जोधपुर के लिए रवाना हो गए, रात को सोचते सोचते अचानक उनको रोहिण्डी ठिकाने के जागीदार का ख्याल आया ।
कुछ ही दिन बाद अचानक एक रात को रोहिण्डी ठिकाने (परबतसर) में दो घुड़सवार बुजुर्ग जागीदार के पोल पर पहुंचे और मिलने की इजाजत मांगी । ठाकुर साहब काफी वृद अवस्था में थे फिर भी उठ कर मेहमान की आवभक्त के लिए बाहर पोल पर आये घुड़सवारों ने प्रणाम किया और वृद ठाकुर की आँखों में चमक सी उभरी और मुस्कराते हुए बोले जोधपुर महाराज आपको मेने गोद में खिलाया है और अस्त्र शस्त्र की शिक्षा दी है इस तरह भेष बदलने पर भी में आपको आवाज से पहचान गया हूँ । हुकम आप अंदर पधारो में आपकी रियासत का छोटा सा जागीरदार, आपने मुझे ही बुलवा लिया होता ।
जोधपुर महाराजा गज सिंह ने उनको झुककर प्रणाम किया और बोले आप मेरे पूजनीय है और गुरु भी है एक समस्या है और उस का जवाब मुझे मिल नही रहा सो आप के पास बड़ी आशा से पधारा हूँ, और फिर उन्होंने बादशाह के दरबार की पूरी कहानी सुना दी, और कहा की अब आप ही बताये की जीवित योद्धा का कैसे पता चले की ये लड़ाई में सिर कटने के बाद भी लड़ेगा ?
रोहणी जागीदार बोले , बस इतनी सी बात “मेरे दोनों बच्चे सिर कटने के बाद भी लड़ेंगे और आप दोनों को ले जाओ दिल्ली दरबार में ये आपकी और राजपूती की लाज जरूर रखेंगे लेकिन ?? लेकिन क्या ?? महाराजा गज सिंह ने पुछा, महाराज थोडा रुकिए में एक बार इनकी माँ से भी कुछ चर्चा कर लूँ इस बारे में । महाराजा गज सिंह ने सोचा आखिर पिता का ह्रदय है कैसे मानेगा अपने दोनों जवान बच्चो के सिर कटवाने को , एक बार महाराजा गज सिंह जी ने सोचा की मुझे दोनों बच्चो को यही छोड़कर चले जाना चाहिए । पर जब उन्होंने देखा की ठाकुर साहब ने ठकुरानी जी को पूछा की ” आपके दोनों बच्चो को दिल्ली मुगल बादशाह के दरबार में भेज रहा हूँ सिर कटवाने को , दोनों में से कोनसा सिर कटने के बाद भी लड़ सकता है ? आप माँ हो आपको ज्यादा पता होगा ,तब ठकुरानी जी ने एक क्षत्राणी की तरह जवाब दिया की बड़ा लड़का तो क़िले और क़िले के बाहर तक भी लड़ लेगा पर छोटा केवल परकोटे में ही लड़ सकता है क्योंकि पैदा होते ही इसको मेरा दूध नही मिला था इसलिए, लड़ दोनों ही सकते है ,आप निश्चित् होकर भेज दो । महाराजा गज सिंह उस वीर माँ को देखते ही रह गए, उस ही समय रोहिण्डी ठाकुर के साथ ही खड़े एक सहयोगी बोल पड़े की हजुर ये तो अभी कुवारा है, इसकी अभी शादी नहीं हुई है तो इसके पीछे सती कौन होगा”
विचार हुआ की इस को अपनी बेटी कौन देगा, तब ही जोधपुर महाराजा के साथ पधारे ओसिया के भाटी सरदार बोल उठे “में दूंगा अपनी बेटी इसको”,
भाटी कुल री रीत ,आ आनंद सु आवती !
करण काज कुल कीत, भटीयानिया होवे सती !!
महाराजा गज सिंह को घोर आस्चर्य हुआ , मान गए राजपूती धर्म को … अच्छा मुहूर्त देख कर,महाराजा गज सिंह जी रोहिण्डी ठाकुर साहब के बड़े पुत्र तोगा राठौर का विवाह रचाते है पर शादी के बाद तोगा बिन्दनी के डेरे जाने से इंकार कर देता है और कहलवाता है की “अब तो हम दोनों का मिलन स्वर्गलोक में ही होगा” कह कर तोगा राठौर आगरा कूच करने की तैयारी करने लगता है, शाहजहा तक समाचार पहूचाये जाते है, एक खास दिन का मुहूर्त देख कर तोगा राठौर आगरा का रास्ता पकड़ता है, दिल्ली के दरबार में आज कुछ विशेष भीड़ थी और हजारो लोग इस द्रश्य को देखने जमा थे । बादशाह शाहजहा ने अपने खास एक्के तोगा राठौर को मरने के लिए तैयार कर रखा थे, तोगा राठौर को मैदान में लाया गया और मुगल बादशाह ने जल्लादो को आदेश दिया की इसकी गर्दन उड़ा दो , तभी बीकानेर महाराजा बोले “ये क्या तमाशा है ? राजपूती इतनी भी सस्ती नही हुई है , लड़ाई का मोका दो और फिर देखो कौन बहादुर है ?
बादशाह ने खुद के सबसे मजबूत और कुशल योद्धा बुलाये और कहा ये जो घुड़सवार मैदान में खड़ा है उसका सिर् काट दो, 20 घुड़सवारों का दल रोहणी ठाकुर के बड़े लड़के का सिर उतारने को लपका और देखते ही देखते उन 20 घुड़सवारों की लाशें मैदान में बिछ गयी ।
दूसरा दस्ता आगे बढ़ा और उसका भी वही हाल हुआ , मुगलो में घबराहट और झुरझरि फेल गयी , बादशाह के 500 सबसे ख़ास योद्धाओ की लाशें मैदान में पड़ी थी और उस वीर राजपूत योद्धा के तलवार की खरोंच भी नही आई ।।
ये देख कर मुगल सेनापति ने कहा ” 500 मुगल बीबियाँ विधवा कर दी आपकी इस परीक्षा ने अब और मत कीजिये हजुर , इस काफ़िर को गोली मरवाईए हजुर ,, तलवार से ये नही मरेगा , कुटिलता और मक्कारी से भरे मुगलो ने उस वीर के सिर में गोलिया मार दी और फिर पीछे से उसका सर काट देते है पर उस वीर के धड़ ने तलवार की मजबूती कम नही करी और तोगा गिरता नहीं है वो अपने दोनों हाथो से तलवार चलते हुए, मुगलों का मरते रहे, मुगलो का कत्लेआम खतरनाक रूप से चलते रहा ।
बादशाह ने तोगा राठौर के छोटे भाई को अपने पास निहथे बेठा रखा था ये सोच कर की ये बड़ा यदि बहादुर निकला तो इस छोटे को कोई जागीर दे कर अपनी सेना में भर्ती कर लूंगा लेकिन जब छोटे ने ये अंन्याय देखा तो उसने झपटकर एक मुग़ल की तलवार निकाल ली । उसी समय बादशाह के अंगरक्षकों ने उनकी गर्दन काट दी फिर भी धड़ तलवार चलाता गया और अंगरक्षकों समेत मुगलो का काल बन गए बाहर मैदान में बड़े भाई और अंदर परकोटे में छोटे भाई का पराक्रम देखते ही बनता था । हजारो की संख्या में मुगल हताहत हो चुके थे और आगे का कुछ पता नही था । शाहजहा खुद बैठे ये नज़ारा देख रहे थे, की अचानक तब ही तोगा लड़ते हुए दरी-खाने तक पहूच जाते है और उन्हें लड़ते हुए अपनी और आता देख बादशाह घबरा जाता है और अपने रानीवास में जा कर छिप जाता है, आखिर बादशाह अपने आदमी को महाराजा गजसिंह के पास भेज कर माफ़ी मागता है की गलती हो गयी अब किसी तरह इन वीरो को शांत करो नहीं तो ये सब को मार देंगे, तब कही शाहजहा के कहने पर गजसिंह ब्राह्मण दुआरा तोगा राठौर और उन के छोटे भाई के धड पर गंगाजल डलवाते है तब जाके वो शांत हो कर गिर जाते है, महाराज गज सिंह दुआर राजकीय सम्मान के साथ उनका शव को डेरे पहूचाया जाता है, वहा भटियानी सौला सिन्गार किये तैयार बैठी होती है, जमुना नदी के किनारे चन्दन की चिता में भटियानी तोगा राठौर का सर और धड को गोद में ले कर राम नाम की रणकार के साथ चिता की अग्नि में समां जाती है !!
“कटार अमरेस री, तोगा री तलवार !
हाथल रायसिंघ री , दिल्ली रे दरबार !!”

History & Literature

श्रावण महीना ना प्रथम सोमवारे भोळा शिव नी एक स्तुति – चारण कवि ब्रह्मानंदजी स्वामी Charan kavi brahmanand swami

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🌞श्री सिध्धेश्र्वरा महादेव नी स्तुति
                  दुहो      

पारवति पति अति प्रबल ,विमल सदा नरवेश
नंदि संग उमंग नीत  समरत जेहि गुन शेष

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                   छंद त्रिभंगी

समरत जेहि शेषा दिपत सुरेशा पुत्र गुणेशा निज प्यारा
ब्रह्मांड प्रवेशा प्रसिध्ध परेशाअजर उमेशा उघ्धारा
बेहद नरवेसा क्रत सिर केशाटलत अशेषा अधरेशा
जयदेव सिध्धेशा हरन कलेशा मगन हमेशा माहेशा  1

भक्तन थट भारी हलक हजारी ,कनक अहारी सुखकारी
सिर गंग सुंधारी द्रढ ब्रह्मचारी हरदुख हारी त्रिपुरारी
रहे ध्यान खुमारी ब्रह्म विहारी गिरजा प्यारी जोगेशा
जयदेव सिध्धेशा हरन कलेशा मगन हमेशा माहेशा 2

कैलाश निवासी जोग अध्यासी रिध्धि सिध्धि दासी प्रति कासी
चित व्योम विलासी हित जुत हासी रटत प्रकासी सुखरासी
मुनि सहस्त्र अठयासी कहि अविनासी जेही दुख त्रासी उपदेशा
जयदेव सिध्धेशा हरन कलेशा मगन हमेशा माहेशा 3

गौरीनीत संगा अति सुभ अंगा हार भुजंगा सिर गंगा
रहवत निज रंगा उठत अवंगा ज्ञान तरंगा अति चंगा
उर होत उमंगा जयक्रत जंगा अचल अभंगा आवेशा
जयदेव सिध्धेशा हरन कलेसा मगन हमेसा माहेशा 4

नाचंत नि:शंका मृगमद पंका घमघम घमका घुघरू का 
ढोलु का धमका होव हमका डम डम डमका डमरु का
रणतुर रणंका भेर भणंका गगन झणंका गहरेशा
जयदेव सिध्धेशा हरन कलेशा ,मगन हमेशा माहेशा 5

मणिधर गल माळा भुप भुजाळा शिश जटाळा चरिताळा
जगभुल प्रजाळा शुळ हथाळा जन प्रतिपाळा जोराळा
दंग तुतिय कराळा हार कुणाळा रहत कपाळा राकेशा
जयदेव सिध्धेशा हरन कलेशा मगन हमेशा माहेशा 7

खळकत शिर निरा अदल अमिरा पिरन पिरा हर पिरा
विहरत संग विरा ध्यावत धीरा गौर सरीरा गंभीरा
दातार रधिरा जहाज बुध्धिरा कांत सिध्धिरा शिर केशा
जयदेव सिध्धेशा हरन कलेशा ,मगन हमेशा माहेशा  7

नररुप बनाया अकळ अमाया कायम काया जगराया
तनकाम जलाया साब सुहाया मुनिउर लाया मनभाया
सिध्धेसर छाया जनसुख पाया मुनि ब्रह्म गाया गुणले शा
जयदेव सिध्धेशा हरन कलेशा ,मगन हमेशा माहेशा

                🌞छप्पय

जय जय देव सिध्धेश शेष निश दिन गुण गावे
दरश परस दुखदुर सुरजन अंतर लावे
अणभय अकळ अपार सार सुंदर जग स्वामी
अगणित कीन उध्धार नार नर चेतन धामी
नररूप मुर्ति नवल नहि शंख्या जेहि नाम की
कहे ब्रह्म मुनि बलिहारी मे शिध्धेशर जग सामकी
                   (   चारण कवि ब्रह्मानंद जी स्वामी    )   

🌞टाईप – हरि गढवी

History & Literature

श्रावण मास – Shravan Mas Shiv Puja

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मित्रो आजथी पवित्र श्रावण मासनो प़ारंभ थाय छे ।
🌻🙏हर हर महादेव🙏🌻

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छे मंत्र महा  मंगळकारी ‍ॐ नम: शिवाय
ए जाप जपे सौ नरनारी ॐ नम: शिवाय

ए मंत्रथी राम विजयने वर्या
श्री रामेश्र्वरने याद कर्या
करी पूजा ने शिव प्रसन्न कर्या ॐ नम: शिवाय …

गांधर्वो जेनुं गान करे
सनकादिक रसपान करे
श्री व्यास सदा मुखथी उचरे ॐ नम: शिवाय…

यम कूबेर इन्द्नादिक देवो
ए मंत्र सदा जपवा जेवो
श्रध्धा राखी शिव ने सेवो ॐ नम: शिवाय …

रूषी मुनीयो जेना ध्याने
वळी वेद पुराण ने पामे
ब्रह्या विष्णु एने वखाणे छे ॐ नम:शिवाय …

ए मंत्रथी सिध्धि सर्व मळे
वळी तन मननां सौ पाप बळे
छेवटे मुकितनुं धाम मळे ॐ नम: शिवाय …

ए मंत्र छे सदा शुभकारी
भवसागरथी ए दे से तारी
प्रेमथी बोलो नरनारी ॐ नम: शिवाय…
{अज्ञात}
🌻🙏हर हर महादेव🙏🌻
पोस्ट  :- सामरा पी गढवी

History & Literature

धरधरमनी धरवा परदःख हरवा मरदो मरवा तेग धरे – Dhar dharam ne dharva pardukh harva mardo marva teg dhare…

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          दुहा
भूमि लाज ने भामनी स्व धरम स्वमान
मरद मेदाने मरवा कहुं करधरे करपान

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Mokhadaji Gohil

अंग जुवानी ऊमटे मनमा होय न मेल
पडे शिर ने धडे खेले खांडा ना खेल

         छंद त्रिभंगी         

खेल जंग खेलाते शरण के आते गाम भंगाते गोकीरे
जर जमीन ने जाते लाज लूंटाते   गाय हराते पडकारे
तंइ भलिय भाते मन मलकाते पंड वेचाते वेर करे
धरधरमनी धरवा परदःख हरवा मरदो मरवा तेग धरे

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Rajput

लीधी वात न मेले पड्ये जेले सौ ने पेले वेर करे
आकाश उथेले आप अकेले अगम उकेले मारी मरे
अंग रगतां रेले जइ जंग खेले धरा धकेले तरवारे
धरधरमनी धरवा पर दुःख हरवा मरदो मरवा तेग धरे

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Rajput

उठे अलबेला थइ रणघेला चडे अकेला रण जंगे
काळ पीधेला शूर भरेला देव दीधेला हय संगे
समर छकेला रंग रगेला मरद मढेला खेल करे
धरधरमनी धरवा पर दुःख हरवा मरदो मरवा तेग धरे

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Rajput

कंइ गरीब नी वारे समदर पारे वेर वधारे अबधूतो
तरवार नी धारे शिश उतारे पर उपकारे रजपूतो
कव्य मेकरण वारे भू भार उतारे हौये न हारे किरत वरे
धरधरमनी धरवा पर दुःख हरवा मरदो मरवा तेग धरे

             दुहा

मारो मरवो म्रद महीपरे अकळावे हाक अथाग
भनंत पडतां भेदु भणे तन रजपुतां ताग

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Rajput

अटके नहि अळपरे अंग जलावे आग
भेदु बंजतां भांखता रण भेरीना राग

History & Literature

शिवाष्टक Shivashtak Shiva Vandna

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जोगीदान गढ़वी कृत शिव वंदना

़            शिवाष्टक
~•°•छंद ः भुजंगप्रयात•°•~

जयो ज्योति रूपम जटाधर जोगी,
नमो नट्टराजन अहालेक भोगी,
शिरे सोम धारी सदा निर्विकारी,
अहोनिशे दिव्यं भजां ओमकारी॥..१

गळे नाग बंधा जटे रुंध गंगा,
कटी व्याघ्रचर्म भरे नित भंगा,
निजानंद मोज़े मजा अल्लगारी,
अहोनिशे दिव्यं भजां ओमकारी॥..२

सती विन शंकर बजे डाक डम्मर,
बने रौद्र बंकर घुमे हर घम्मर,
रुवे रोम राजे नमो अर्धनारी,
अहोनिशे दिव्यं भजां ओमकारी॥..३

त्रणे लोक तारे उजारे महेशा,
करे कोप तो खोपरा कर ग्रहेशा,
नचे नाच तांडव रीझे प्रलेकारी,
अहोनिशे दिव्यं भजां ओमकारी॥..४

पृथी सर्ग पाताल महादेव दाता,
भवो पाप जाता भोळा मन भाता,
जपा नामं जारी मुखे त्रिपुरारी
अहोनिशे दिव्यं भजां ओमकारी॥..५

तमो देव आदी अनादी सुरेशां,
झरे तेज काया न रूपा उमेशां,
सदा सेव लिंगा स्वरूपम सारी,
अहोनिशे दिव्यं भजां ओमकारी॥..६

सतो गुण सेवा रीदये एव हेवा,
मलो मान मेवा महादेव देवा,
हरो हर्र दुःखह् शुभम सुखकारी,
अहोनिशे दिव्यं भजां ओमकारी॥..७

सुरो कोटी पाये पड़ी तप तापे,
नमे नाग चारण गंधर्व जापे,
दिया वर्र दानव ने भारोभारी,
अहोनिशे दिव्यं भजां ओमकारी॥..८
– दिव्यराजसिंह सरवैया कृत शिवाष्टक

History & Literature

नमस्तु मात हिंगलाज – Hinglaj Maa Stuti

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                नमस्तु मात हिंगलाज

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                        होग फीण छंद

प्रचंड दंड बाहु चन्ड योग निद्रा भेरवी
भुजंग केश कुन्डलाय कन्ठला मनोहरी
निकंद काम क्रोध दैत्य असुर काल मर्दनी
नमस्तुं मात हिंगलाज निरमला निरंजनी                 (1)

रक्त सींग आसनी सावधान संकरी
कुठार खडग खप्रधार कर दलन महेश्वरी
निसम्भ सम्भ रक्तबीज देत्य तेज गंजनी
नमस्तुं मात हिंगलाज निरमला निरंजनी                   (2)

ज्वाहिर रत्न बेल केल सर्व कर्म लोलनी
व्याल माल चंद्र केत पुष्प माल मेखली
चंन्ड मुन्ड गर्जनी सुनाद बिन्द वासनी
नमस्तुं मात हिंगलाज निरमला निरंजनी                  (3)

गजेन्द्र चाल काल धुम सेतुं चाल लोलनी
उदार तेज तिमर नास सुसोभे शेश संकरी
अनाद सिध्ध साद लोक सप्त दिप बिराजनी
नमस्तुं मात हिंगलाज निरमला निरंजनी              (4)

शैल शिखर राजनी जोग जुगत कारनी
चंड मुन्ड चुरकर सहस्त भुज दायनी
बिकराल केश भेश भुत अन्त रूप दायनी
नमस्तुं मात हिंगलाज निरमला निरंजनी               (5)

कलोल लोल कोचनी आनद कुद दायती
हद्य कपाट खोलनी सुरेश शब्द भासनी
धर्मकर्म जन्म मात भली मुक्ती दायती
नमस्तुं मात हिंगलाज निरमला निरंजनी               (6)

अलोक लोक राजनी दिव्य देव वरदायनी
त्रीलोक शोक हारणी सत्य वाक्य बोलनी
आदि अंत मद्य मात तेरो रूप सर्जनी
नमस्तुं मात हिंगलाज निरमला निरंजनी              (7)

कुबेर वरूण इन्द्र आदि सिद्धि साद रंजनी
अगम पंथ दर्श मात जन्म कष्ट हारणी
श्री राम चंन्द्र शरण मात अमर पद दायनी
नमस्तुं मात हिंगलाज निरमला निरंजनी           (8)

शेश सार नार दाहि योग निद्रा भेरवी
गंध मदन केल करत मंग दैत्य मर्दनी
अंब खंब फाडनी हव्य कव्य दायनी
नमस्तुं मात हिंगलाज निरमला निरंजनी               (9)

अष्ट हंस गर्जनी त्रिसुल चक्र धारनी
काल कन्ठ कुठ ब्याल मुन्डमाल धारनी
धुमधार श्वेतरूप दैत्य गर्भ भंजनी
नमस्तुं मात हिंगलाज निरमला निरंजनी              (10)
अज्ञात

पोस्ट : हरि गढवी

History & Literature

रामायण की चोपाई के माध्यम से कुछ जीवन के कुछ महत्वपूर्ण मंत्र दिए जा रहे है जिनके जाप से सत्-प्रतिशत सफलता मिलती है- Chopai of Ramayana

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रामायण की चोपाई के माध्यम से कुछ जीवन के कुछ महत्वपूर्ण मंत्र दिए जा रहे है जिनके जाप से सत्-प्रतिशत सफलता मिलती है आप से अनुरोध है इन मंत्रो का जीवन मे प्रयोग अवश्य करे प्रभु श्री राम और श्री बालाजी सरकार आप के जीवन को सुख मय बना देगे !!

रक्षा के लिए
      मामभिरक्षक रघुकुल नायक !
      घृत वर चाप रुचिर कर सायक !!

विपत्ति दूर करने के लिए
     राजिव नयन धरे धनु सायक !
     भक्त विपत्ति भंजन सुखदायक !!

सहायता के लिए
      मोरे हित हरि सम नहि कोऊ !
      एहि अवसर सहाय सोई होऊ !!

सब काम बनाने के लिए
      वंदौ बाल रुप सोई रामू !!
     सब सिधि सुलभ जपत जोहि नामू !!

वश मे करने के लिए
     सुमिर पवन सुत पावन नामू !!
     अपने वश कर राखे राम !!

संकट से बचने के लिए
     दीन दयालु विरद संभारी !!
     हरहु नाथ मम संकट भारी !!

विघ्न विनाश के लिए
     सकल विघ्न व्यापहि नहि तेही !!
     राम सुकृपा बिलोकहि जेहि !

रोग विनाश के लिए
     राम कृपा नाशहि सव रोगा !
     जो यहि भाँति बनहि संयोगा !!

ज्वार ताप दूर करने के लिए
     दैहिक दैविक भोतिक तापा !
     राम राज्य नहि काहुहि व्यापा !!

दुःख नाश के लिए
      राम भक्ति मणि उस बस जाके !
      दुःख लवलेस न सपनेहु ताके !

खोई चीज पाने के लिए
      गई बहोरि गरीब नेवाजू !
      सरल सबल साहिब रघुराजू !!

अनुराग बढाने के लिए
     सीता राम चरण रत मोरे !
     अनुदिन बढे अनुग्रह तोरे !!

घर मे सुख लाने के लिए
     जै सकाम नर सुनहि जे गावहि !
     सुख सम्पत्ति नाना विधि पावहिं !!

सुधार करने के लिए
     मोहि सुधारहि सोई सब भाँती !
     जासु कृपा नहि कृपा अघाती !!

विद्या पाने के लिए
     गुरू गृह पढन गए रघुराई !
    अल्प काल विधा सब आई !!

सरस्वती निवास के लिए
     जेहि पर कृपा करहि जन जानी !
     कवि उर अजिर नचावहि बानी !

निर्मल बुध्दि के लिए
      ताके युग पदं कमल मनाऊँ !!
      जासु कृपा निर्मल मति पाऊँ !!

मोह नाश के लिए
      होय विवेक मोह भ्रम भागा !
      तब रघुनाथ चरण अनुरागा !!

प्रेम बढाने के लिए
      सब नर करहिं परस्पर प्रीती !
      चलत स्वधर्म कीरत श्रुति रीती !!

प्रीती बढाने के लिए
      बैर न कर काह सन कोई !
      जासन बैर प्रीति कर सोई !!

सुख प्रप्ति के लिए
      अनुजन संयुत भोजन करही !
      देखि सकल जननी सुख भरहीं !!

भाई का प्रेम पाने के लिए
      सेवाहि सानुकूल सब भाई !
      राम चरण रति अति अधिकाई !!

बैर दूर करने के लिए
      बैर न कर काहू सन कोई !
      राम प्रताप विषमता खोई !!

मेल कराने के लिए
      गरल सुधा रिपु करही मिलाई !
      गोपद सिंधु अनल सितलाई !!

शत्रु नाश के लिए
     जाके सुमिरन ते रिपु नासा !
     नाम शत्रुघ्न वेद प्रकाशा !!

रोजगार पाने के लिए
     विश्व भरण पोषण करि जोई !
     ताकर नाम भरत अस होई !!

इच्छा पूरी करने के लिए
     राम सदा सेवक रूचि राखी !
     वेद पुराण साधु सुर साखी !!

पाप विनाश के लिए
     पापी जाकर नाम सुमिरहीं !
     अति अपार भव भवसागर तरहीं !!

अल्प मृत्यु न होने के लिए
     अल्प मृत्यु नहि कबजिहूँ पीरा !
     सब सुन्दर सब निरूज शरीरा !!

दरिद्रता दूर के लिए
     नहि दरिद्र कोऊ दुःखी न दीना !
     नहि कोऊ अबुध न लक्षण हीना !!

प्रभु दर्शन पाने के लिए
     अतिशय प्रीति देख रघुवीरा !
     प्रकटे ह्रदय हरण भव पीरा !!

शोक दूर करने के लिए
     नयन बन्त रघुपतहिं बिलोकी !
     आए जन्म फल होहिं विशोकी !!

क्षमा माँगने के लिए
     अनुचित बहुत कहहूँ अज्ञाता !
     क्षमहुँ क्षमा मन्दिर दोऊ भ्राता !!

History & Literature

भारत का संक्षिप्त इतिहास History of India

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खुद जाने और शेयर भी करें ….
भारत का राष्ट्रीय ध्वज – तिरंगा
भारत का राष्ट्रीय गान – जन-गन-मन
भारत का राष्ट्रीय गीत – वन्दे मातरम्
भारत का राष्ट्रीय चिन्ह – अशोक स्तम्भ
भारत का राष्ट्रीय पंचांग – शक संवत
भारत का राष्ट्रीय वाक्य – सत्यमेव जयते
भारत की राष्ट्रीयता – भारतीयता
भारत की राष्ट्र भाषा – हिंदी
भारत की राष्ट्रीय लिपि – देव नागरी
भारत का राष्ट्रीय ध्वज गीत – हिंद देश
का प्यारा झंडा
भारत का राष्ट्रीय नारा – श्रमेव जयते
भारत की राष्ट्रीय विदेशनीति -गुट निरपेक्ष
भारत का राष्ट्रीय पुरस्कार – भारत रत्न
भारत का राष्ट्रीय सूचना पत्र – श्वेत पत्र
भारत का राष्ट्रीय वृक्ष – बरगद
भारत की राष्ट्रीय मुद्रा – रूपया
भारत की राष्ट्रीय नदी – गंगा
भारत का राष्ट्रीय पक्षी – मोर
भारत का राष्ट्रीय पशु – बाघ
भारत का राष्ट्रीय फूल – कमल
भारत का राष्ट्रीय फल – आम
भारत की राष्ट्रीय योजना – पञ्च वर्षीय योजना
भारत का राष्ट्रीय खेल – हॉकी
भारत की राष्ट्रीय मिठाई – जलेबी
भारत के राष्ट्रीय पर्व 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) और 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस)

भारत का संक्षिप्त इतिहास

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563 : गौतम बुद्ध का जन्‍म

540 : महावीर का जन्‍म

327-326 : भारत पर एलेक्‍जेंडर का हमला। इसने भारत और यूरोप के बीच एक भू-मार्ग खोल दिया

313 : जैन परंपरा के अनुसार चंद्रगुप्‍त का राज्‍याभिषेक

305 : चंद्रगुप्‍त मौर्य के हाथों सेल्‍युकस की पराजय

273-232 : अशोक का शासन

261 : कलिंग की विजय

145-101 : एलारा का क्षेत्र, श्रीलंका के चोल राजा

58 : विक्रम संवत् का आरम्‍भ

78 : शक संवत् का आरम्‍भ

120 : कनिष्‍क का राज्‍याभिषेक

320 : गुप्‍त युग का आरम्‍भ, भारत का स्‍वर्णिम काल

380 : विक्रमादित्‍य का राज्‍याभिषेक

405-411 : चीनी यात्री फाहयान की यात्रा

415 : कुमार गुप्‍त-1 का राज्‍याभि‍षेक

455 : स्‍कंदगुप्‍त का राज्‍याभिषेक

606-647 : हर्षवर्धन का शासन

712 : सिंध पर पहला अरब आक्रमण836 : कन्‍नौज के भोज राजा का राज्‍याभिषेक

985 : चोल शासक राजाराज का राज्‍याभिषेक

998 : सुल्‍तान महमूद का राज्‍याभिषेक

1000 से 1499

1001 : महमूद गजनी द्वारा भारत पर पहला आक्रमण, जिसने पंजाब के शासक जयपाल को हराया था

1025 : महमूद गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर का विध्‍वंस

1191 : तराई का पहला युद्ध

1192 : तराई का दूसरा युद्ध

1206 : दिल्‍ली की गद्दी पर कुतुबुद्दीन ऐबक का राज्‍याभिषेक

1210 : कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्‍यु

1221 : भारत पर चंगेज खान का हमला (मंगोल का आक्रमण)

1236 : दिल्‍ली की गद्दी पर रजिया सुल्‍तान का राज्‍याभिषेक

1240 : रजिया सुल्‍तान की मृत्‍यु

1296 : अलाउद्दीन खिलजी का हमला

1316 : अलाउद्दीन खिलजी की मृत्‍यु

1325 : मोहम्‍मद तुगलक का राज्‍याभिषेक

1327 : तुगलकों द्वारा दिल्‍ली से दौलताबाद और फिर दक्‍कन को राजधानी बनाया जाना

1336 : दक्षिण में विजयानगर साम्राज्‍य की स्‍थापना

1351 : फिरोजशाह का राज्‍याभिषेक

1398 : तैमूरलंग द्वारा भारत पर हमला

1469 : गुरुनानक का जन्‍म

1494 : फरघाना में बाबर का राज्‍याभिषेक

1497-98 : वास्‍को-डि-गामा की भारत की पहली यात्रा (केप ऑफ गुड होप के जरिए भारत तक समुद्री रास्‍ते   की खोज)

1500 से 1799

1526 : पानीपत की पहली लड़ाई, बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराया- बाबर द्वारा मुगल शासन की स्‍थापना

1527 खानवा की लड़ाई, बाबर ने राणा सांगा को हराया

1530 : बाबर की मृत्‍यु और हुमायूं का राज्‍याभिषेक

1539 : शेरशाह सूरी ने हुमायूं का
हराया और भारतीय का सम्राट बन गया

1540 : कन्‍नौज की लड़ाई

1555 : हुमायूं ने दिल्‍ली की गद्दी को फिर से हथिया लिया

1556 : पानीपत की दूसरी लड़ाई

1565 : तालीकोट की लड़ाई

1576 : हल्‍दीघाटी की लड़ाई- राणा प्रताप ने अकबर को हराया

1582 : अकबर द्वारा दीन-ए-इलाही की स्‍थापना

1597 : राणा प्रताप की मृत्‍यु

1600 : ईस्‍ट इंडिया कंपनी की स्‍थापना

1605 : अकबर की मृत्‍यु और जहाँगीर का राज्‍याभिषेक

1606 : गुरु अर्जुन देव का वध

1611 : नूरजहाँ से जहांगीर का विवाह

1616 : सर थॉमस रो ने जहाँगीर से मुलाकात की

1627 : शिवाजी का जन्‍म और जहांगीर की मृत्‍यु

1628 : शाहजहां भारत के सम्राट बने

1631 : मुमताज महल की मृत्‍यु

1634 : भारत के बंगाल में अंग्रेजों को व्‍यापार करने की अनुमति दे दी गई

1659 : औरंगजेब का राज्‍याभिषेक, शाहजहाँ को कैद कर लिया गया

1665 : औरंगजेब द्वारा शिवाजी को कैद कर लिया गया

1680 : शिवाजी की मृत्‍यु

1707 : औरंगजेब की मृत्‍यु

1708 : गुरु गोबिंद सिंह की मृत्‍यु

1739 : नादिरशाह का भारत पर हमला

1757 : प्‍लासी की लड़ाई, लॉर्ड क्‍लाइव के हाथों भारत में अंग्रेजों के राजनीतिक शासन की स्‍थापना 1761पानीपत की तीसरी लड़ाई, शाहआलम द्वितीय भारत के सम्राट बने

1764 : बक्‍सर की लड़ाई

1765 : क्‍लाइव को भारत में कंपनी का गर्वनर नियुक्‍त किया गया

1767-69 : पहला मैसूर युद्ध

1770 : बंगाल का महान अकाल

1780 : महाराजा रणजीत सिंह का जन्‍म

1780-84 : दूसरा मैसूर युद्ध

1784 : पिट्स अधिनियम

1793 : बंगाल में स्‍थायी बंदोबस्‍त

1799 : चौथा मैसूर युद्ध- टीपू सुल्‍तान की मृत्‍यु

1800 – 1900संपादित करें

1802 : बेसेन की संधि

1809 : अमृतसर की संधि

1829 : सती प्रथा को प्रतिबंधित किया गया

1830 : ब्रह्म समाज के संस्‍थापक राजाराम मोहन राय की इंग्‍लैंड की यात्रा

1833 : राजाराम मोहन राय की मृत्‍यु

1839 : महाराजा रणजीत सिंह की मृत्‍यु

1839-42 : पहला अफगान युद्ध

1845-46 : पहला अंग्रेज-सिक्‍ख युद्ध

1852 : दूसरा अंग्रेज-बर्मा युद्ध

1853 : बांबे से थाने के बीच पहली रेलवे लाइन और कलकत्‍ता में टेलीग्राफ लाइन खोली गई

1857 : स्‍वतंत्रता का पहला संग्राम (या सिपाही विद्रोह)

1861 : रबीन्‍द्रनाथ टैगोर का जन्‍म

1869 : महात्‍मा गांधी का जन्‍म

1885 : भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस की स्‍थापना

1889 : जवाहरलाल नेहरु का जन्‍म

1897 : सुभाष चंद्र बोस का जन्‍म

1900 से भारत की स्वतंत्रतता तक

1904 : तिब्‍बत की यात्रा

1905 : लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल का पहला बंटवारा

1906 : मुस्लिम लीग की स्‍थापना

1911 : दिल्‍ली दरबार- ब्रिटिश के राजा और रानी की भारत यात्रा- दिल्‍ली भारत की राजधानी बनी

1916 : पहले विश्‍व युद्ध की शुरुआत

1916 : मुस्लिम लीग और कांग्रेस द्वारा लखनऊ समझौते पर हस्‍स्‍‍ताक्षर

1918 : पहले विश्‍व युद्ध की समाप्ति

1919 : मताधिकार पर साउथबरो कमिटी, मांटेग्‍यू-चेम्‍सफोर्ड सुधार- अमृतसर में जालियाँवाला बाग हत्‍याकांड

1920 : खिलाफत आंदोलन की शुरुआत

1927 : साइमन कमीशन का बहिष्‍कार, भारत में प्रसारण की शुरुआत

1928 : लाला लाजपतराय की मृत्‍यु (शेर-ए-पंजाब)

1929 : लॉर्ड ऑर्वम समझौता, लाहौर कांग्रेस में पूर्ण स्‍वतंत्रता का प्रस्‍ताव पास

1930 : सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत- महात्‍मा गांधी द्वारा दांडी मार्च (अप्रैल 6, 1930)

1931 : गांधी-इर्विन समझौता

1935 : भारत सरकार अधिनियम पारित

1937 : प्रांतीय स्‍वायतता, कांग्रेस मंत्रियों का पदग्रहण

1941 : रबीन्‍द्रनाथ टैगोर की मृत्‍यु, भारत से सुभाष चंद्र बोस का पलायन

1942 : क्रिप्‍स मिशन के भारत आगमन पर भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत

1943-44 : नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने प्रांतीय आजाद हिंदू हुकूमत, भारतीय राष्‍ट्रीय सेना की स्‍थापना की और बंगाल में अकाल

1945 : लाल‍ किले में आईएनए का ट्रायल, शिमला समझौता और द्वितीय विश्‍व युद्ध की समाप्ति

1946 : ब्रिटिश कैबिनेट मिशन की भारत यात्रा- केंद्र में अंतरिम सरकार का गठन

1947 : भारत का विभाजन व स्वतंत्रता

आजादी के बाद का इतिहास इस प्रकार है

1947 : 15 अगस्त को देश को अंग्रेजों की गुलामी से निजात मिली।

1948 : 30 जनवरी को महात्मा गाँधी की हत्या। इसी वर्ष भारतीय हॉकी टीम ने लंदन ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीता।

1950 : 26 जनवरी को भारत गणतंत्र बना। संविधान लागू।

1951 : देश की पहली पंचवर्षीय योजना लागू।

1952 : देश में पहले आम चुनाव। कांग्रेस 489 में से 364 सीटें जीतकर सत्ता पर काबिज। हेलसिंकी ओलिंपिक में भारतीय हॉकी टीम को स्वर्णिम सफलता।

1954 : भारत और चीन के बीच पंचशील समझौता।

1956 : राज्यों का पुनर्गठन।

1960 : भारत और पाकिस्तान में सिंधु जल समझौता।

1962 : अक्टूबर में चीन ने भारत पर हमला किया। नवंबर में चीन का दूसरा हमला। आजादी की फिजा में साँस ले रहे देश के युवकों के लिए पहली गंभीर चुनौती।

1963 : भारत ने पहला रॉकेट प्रक्षेपण किया।

1964 : जवाहरलाल नेहरू की मौत। लालबहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बने।

1965 : कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच दूसरी जंग।

1966 : लालबहादुर शास्त्री का निधन। इंदिरा गाँधी देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। ऑपरेशन फ्लड की शुरुआत।

1967 : हरित क्रांति की शुरुआत।

1969 : कांग्रेस का विभाजन। बैंकों का राष्ट्रीयकरण। पहली सुपरफास्ट रेलगाड़ी राजधानीc   एक्सप्रेस नई दिल्ली से हावड़ा के बीच दौड़ी। रेलवे की एक बड़ी उपलब्धि।

1971 : भारत और पाकिस्तान के बीच जंग। बांग्लादेश का उदय। पाकिस्तान की करारी हार।

1972 : भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला समझौता।

1974 : 18 मई 1974 को पोखरन में परमाणु परीक्षण कर भारत छठी परमाणु ताकत बना।

1975 : प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की। जयप्रकाश नारायण, जॉर्ज फर्नांडीस और अटलबिहारी वाजपेयी सहित कई विपक्षी नेता गिरफ्तार। प्रेस की आजादी पर प्रतिबंध। भारत के पहले उपग्रह आर्यभट्ट का प्रक्षेपण। फिल्म शोले ने बॉक्स आफिस के सारे कीर्तिमान तोड़े।

1976 : भारत और पाकिस्तान के बीच समझौता एक्सप्रेस शुरू।

🙏  🙏

History & Literature

लोकसाहित्य ना दूहा Loksahitya/CharniSahitya Duha

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परण्या नी पे’ली रात होय, पे’लो पो’र होय, ओरडा नी मालपा जाकजमाळ दीवो बळतो होय – ए समा ना अदभूत दुहा छे आपणा लोकसाहित्य मां :

थंभ थडके मेडी हसे, खेलण लागी खाट,
सो सजणा भले आवीया, जेनी जोतां वाट.

जेनी जोतां वाट, ए साजण सामा मळ्या,
पछी उघड्यां हैया नां हाट, काम नो पड्यां कुंची पड्यां.

अने रूप रूप ना अंबार समी, सिंहलदीप नी सुंदरी जेवी, पाताळ नी पदमणी जेवी गोरांदे धीमां धीमां धीमां डगलां मांडती ओरडे डग देती होय.

मोथवाणी एलचीवाणी,
खळखळते पाणीये नाई,
घट समाणो आरीसो मांडी,
वाळे वाळे मोती ठांसी,
हाले तो कंकु केसर नां पगलां पडे,
बोले तो बत्री पांखडी नां फूल जरे,
एवी हाम काम लोचना,
त्राठी मृगली ना जेवां नेण,
भुखी सिंहण ना जेवो कडनो लांक,
जाणे उगतो आंबो,
राण्य नो कोळांबो,
बारवटिया नी बरछी,
होळी नी जाळ,
पूनम नो चन्दरमा,
जूनी वाड्य नो भडको,
भादरवा नो तडको,
पाणी पीवे तो गळा सोंसरो घुंटडो देखाय,
संकेली नखमां समाय,
उडाडी आभ मां जाय,
उगमणा वा वाय तो आथमणी नमे,
आथमणा वाय तो उगमणी नमे,
ने चारे दश्य ना वाय तो भांगी ने भुको थई जाय,
एवां रूप लई,
थाळ पीरसी,
सुंदरी त्रणसे ने सांईठ पगथीयां चडी,
त्यांतो ‘आवो आवो आवो’ एवा त्रण आवकारा मळ्या,
मानसरवर नो हंसलो जेम मोतीडां चरे,
एम स्वामीनां त्रण नवालां लीधां,
ने रंग ना चार पोर वित्या.

आवी सुंदरी होय. केवी ?
के’ “सरग नी अपसरा जेवी ?’
के “ना ना ना’
तो के’ “मानसकवर नी हंसली जेवी ?’
के “ना ना ना ना’
तो के ‘केवी ?’
के –
नमणी खमणी बौ गणी,  सुकोमळी सुकच्छ,
गोरी गंगा नीर ज्युं, मन गरवी तन अच्छ.

वाणी मां वाराणसी, जेना कंठ मां कोयलडी,
रूप रंभा गुण गौरी ना, जेनी अमियल आंखलडी.

आंखडीयुं अणीयाणीयुं, सरजीं पधरीयुं,
जेना सामी नोंधीयुं, एना काळजा सोंसरीयुं.

लंब वेणी लज्जा घणी, जेनां पोचां पातळीयां,
आछे छांये निपावियां, को’ को’ कामणीयां.

पीतळ सरखी पीनीयुं, हेंगळा वरणा हाथ,
पंड बनावेल पूतळी, जेदी’ नवरो दीनोनाथ.

भगवाने जाणे साडा त्रण दी’ नी नवराश लईने घडी होय, रूप ओगळी ने हालतुं थाय एवी मीण नी पूतळी सरखी गोरांदे डगलां मांडे –

मारू चाली मो’ल पर, दिपक जगाड्ये,
हनवो जाणे हालीयो, लंका लगाड्ये.

मारू चाली मो’ल पर, छुटा मेल्या केश,
जाणे छत्रपत हालीयो, को’क नमावा देश.

मारू चली मोल पर, छोडे कळरी लाज,
अरियारा गढ उपरे, धधकार्यो गजराज.

मारू चडी पलंग पर, कचवा मेल्या दुर,
चकवा मन आंनंद थ्या, जाणे उग्या सुर.

उंचो नाळीयेर ओरडो, ने मधरो शीशो हाथ,
लडथडती प्याली लीये, ने चोमारी रात.

अने पछी तो धण – पियु नुं मिलन थाय. अरसपरस अंतर ना तार सधाई जाय, अने –

नेण पदारथ नेण रस, नेणे नेण मळन्त,
अणजाण्यासु प्रितडी, नेणे नेण करन्त.

मुं मन लागी तुं मना, तुं मन लागी मुं,
लुण वळुंभ्यां पाणीये, पाणी वळुंभ्यां लुण.

लुण पाणी ओगळी ने जेम एकरस थई जाय एम साम सामां अंतर एकाकार थई गयां. अने पछे तो –

पे’लो पोरो रेनरो, दिवडा जाकमजोळ,
पीयु कंटाळो केवडो, धण कंकु नी लोळ.

बीजो पोरो रेनरो, वीधीआ नेह सनेह,
धण त्यां धरती हो रही, पियु अषाढो मेह.

त्रिजो पोरो रेनरो, दिवडा शाख भरे,
धण जीती पियु हारीयो, राख्यो हार करे.

चोथो पो’रो रेनरो, बोल्या कुकड काग,
धण संभाळे कंचवो, पियु संभाळे काग.

आवा तो अनेक दुहा ‘लोक साहित्य अने चारणी साहित्य मां पड्या छे. फरीवार आवी ज रूपाळी पोस्ट साथे फरी मळीशुं.
जय माताजी.
पोस्ट – चमन गज्जर

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