श्याम विना व्रज सुनु लागे , ओधा हमको न भावे रे

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श्याम विना व्रज सुनु लागे , ओधा हमको न भावे रे

श्याम विना व्रज सुनु लागे !

.󾁅.
विकट दिशे यमुना किनारो , वहमो लागे वनरावन हारो

अति तलखे जीव हमारो , मोहन कौन मिलावे रे

श्याम विना व्रज सुनु लागे !

.󾁅.
चित्त हमारो गयो चूरा के , मोहन मीठी मीठी बैन बजा के

पहले हम से प्रीत लगा के , रजळती मेली मने मावे रे

श्याम विना व्रज सुनु लागे !

.󾁅.
हाल हमारा श्री कृष्ण को किजीये , यादवराय को संदेशो दिजीये

मुज रंक पर रिस न किजीये , करुणा सिंधु कहावे रे

श्याम विना व्रज सुनु लागे !

.󾁅.
रोवन लागी व्रज की नारी , शकल जगत के काज विसारी

” थायोॅ चारण ” कहे प्रभु चरण बलिहारी , दिल मे ध्यान लगावे रे

श्याम विना व्रज सुनु लागे !
★★{ραявαт}★★

History & Literature

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