ए पण एक गमार

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नीर अपराधी जीव नो शोख थी करे शीकार,
त्रास नहीं इश्वर तणो
ऐ पण ऐक गमार

बुरा हाल बदली गया सुख पाम्यो संसार,
दिन दुखीया ने विसरी गयो
ऐ पण ऐक गमार

काज नहीं उतम करे ने अती राखे अहंकार,
कह्यु करे नहीं कोई नु
ऐ पण ऐक गमार

भाईबंध नी ऐक भुल नो धोखो करे धरार,
कायम ज्यां त्यां गाया करे
ऐ पण ऐक गमार

काम बगाडी पोताना घर तणुं गाम मा आंटा दिये अपार,
करज करी नी कीर्ति करे
ऐ पण ऐक गमार

भेंस गाय ने भाव थी जे आपे नहीं आहार,
पछी दुध माटे दोट्यु दिये
ऐ पण ऐक गमार

मनुष्य देह मळ्या छतां जो भजे नहीं कीरतार,
अफीण थी प्रीती करे
ऐ पण ऐक गमार

माने मनमा मानवी जे दारु ने दिलदार,
प्याली पीधा पछी परवश बने
ऐ पण ऐक गमार

खुशामती ने लालचु जो पैसा नो ज होय प्यार,
ऐवो कवीजन कुळो होय तो
ऐ पण ऐक गमार

दरदी नी दरकार नहीं ऐकला पैसा लेवामां ज प्यार,
वैद होय जो लोभीयो
ऐ पण ऐक गमार

सांती नो सांधो नहीं ने खळ खेतर मा अपार,
खातर जो खेडुत वेंचतो 
ऐ पण ऐक गमार

न्याय ना आसने बेठा पछी जे न्याय नो करनार,
करे पक्ष जो कोई ऐक नो
ऐ पण ऐक गमार

वहीवट करतां विश्व मां थाय जो बेदरकार,
कागळ्या लंबाव्या करे
ऐ पण ऐक गमार

History & Literature

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