हम्मीरदेव चौहान रणथंभोर Hamirdev Chauhan Ranthambhor

Standard

हम्मीरदेव चौहान रणथंभोर

image

एक राजपूत जिसने चार मुस्लिम शरणार्थी परिवारो की खातिर अपना सब कुछ लूटा दिया अपना राज्य अपना परिवार अपना सब कुछ …..

अलाउद्दीन खिलजी की सेना गुजरात विजय से लौट रही थी रास्ते में गुजरात से लूटे धन के बंटवारे को लेकर उसके सेनानायिकों में विवाद हो गया | विवाद के चलते अलाउद्दीन का एक सेनानायिक पीर मुहम्मद शाह अपने भाइयों सहित बागी होकर रणथंभोर के इतिहास प्रसिद्ध शासक हम्मीरदेव के पास शरण हेतु चला गया | शरणागत की रक्षा करना क्षत्रिय का कर्तव्य होता है इसी कर्तव्य को निभाने हेतु हम्मीरदेव ने उन मुसलमान भाइयों को शरण दे दी | अपने बागी सेनानायिकों को हम्मीरदेव द्वारा शरण देना अलाउद्दीन खिलजी को नागवार गुजरा सो उसने एक विशाल सेना उलुगखां व निसुरतखां के नेतृत्व में हम्मीर के खिलाफ रणथंभोर भेज दी | उलुगखां ने हम्मीर को सन्देश भिजवाया कि- ” वह उसके चार बागी मुसलमान सैनिको को उसे सौंप दे वह सेना लेकर वापस चला जायेगा पर हठी हम्मीर ने तो कह दिया कि –
“शरण में आये किसी भी व्यक्ति की रक्षा करना उसका कर्तव्य है इसलिए बेशक तुमसे युद्ध करना पड़े पर शरणागत को वापस नहीं करूँगा |”

इसके बाद दोनों और से एक दुसरे पर हमले हुए,हम्मीर के चौहान सैनिक अलाउद्दीन की सेना पर भारी पड़ रहे थे उन्हें जीतना आसान न था सो अलाउद्दीन खुद युद्ध के मैदान में आ डटा |
युद्ध में हम्मीर को परास्त करना बहुत मुश्किल था सो अलाउद्दीन ने कूटनीति चली उसने हम्मीर से संधि करने उसके आदमी भेजने को कहा और हम्मीर ने अपने जिस सेनापति को संधि के लिए भेजा अलाउद्दीन ने उसे रणथंभोर का राज्य देने का लालच दे अपनी और मिला लिया | किले के चारों और कई महीनों से घेरा पड़ा होने के चलते किले में राशन की भी कमी हो गयी थी उधर हम्मीर को अपने कई व्यक्तियों के शत्रु से मिलने की खबर से बड़ी खिन्नता हुई | चारों तरफ से धोखेबाजी की आशंका के चलते हम्मीर ने शाका करने का निर्णय लिया व मुहम्मदशाह को बुलाकर कहा –
” आप विदेशी है,आपत्ति के समय आपका यहाँ रहना उचित नहीं अत: आप जहाँ जाना चाहें स्वतंत्र है जा सकते है मैं आपको सुरक्षित जगह पहुंचा दूंगा |”
मुहम्मदशाह हम्मीरदेव के इन वचनों से बहुत मर्मविद्ध हुआ उसे लगा कि -कई लोगों से धोखा खाने के चलते कहीं हम्मीरदेव मुझ पर भी शंका तो नहीं करने लग गए | वह उसी वक्त अपने घर गया और अपने पुरे कुटुंब का क़त्ल कर दिया फिर आकर उसने हम्मीर से कहा –
“मेरे परिवार ने जाने की तैयारी करली है पर आपकी भाभी चाहती है कि जिसकी कृपा से इतने दिन आनंद से रहे उसके एक बार दर्शन तो करलें | सो महाराज एक बार मेरे घर चल कर मेरी पत्नी को दर्शन तो दे दीजिये |”

महाराज हम्मीरदेव मुहम्मदशाह के घर पहुंचे तो वहां का दृश्य देख हक्के बक्के रह गए,घर में चारों और खून बह रहा था मुहम्मदशाह की स्त्री व बच्चों के कटे अंग पड़े थे | हम्मीरदेव समझ गए कि ये सब किस वजह से हुआ है उन्हें मुहम्मदशाह को जाने वाली बात कहने का अब बहुत पश्चताप हुआ पर अब हो ही क्या सकता था |
आखिर वो दिन आ ही गया जिस दिन हम्मीरदेव ने केसरिया वस्त्र धारण कर किले के द्वार खोल शाका किया | उस युद्ध में मुहम्मदशाह और उसके भाइयों ने बड़ी वीरता के साथ युद्ध किया | मुहम्मदशाह को कई गोलियां लगी वह घायल होकर मूर्छित हो गया | स्वजातीय को न मारने की नीति के तहत उसे पकड़ कर अलाउद्दीन के पास ले जाया गया | अलाउद्दीन ने उस घायल मुहम्मदशाह से कहा –
” मैं तुम्हारे घावों की मरहम पट्टी करवाकर तुम्हे स्वस्थ करवा दूंगा पर ये बताओ कि स्वस्थ होने के बाद तुम मेरे साथ क्या सलूक करोगे ?”
” वही जो तुमने हम्मीरदेव के साथ किया | मैं तुम्हे मारकर तुम्हारी जगह हम्मीरदेव के पुत्र का राज्याभिषेक करवा दूंगा |” घायल मुहम्मदशाह ने फुफकारते हुए कहा | ऐसे शब्द कहने वाले मुहम्मदशाह की समानता तो कोई विरला वीर ही कर सकता है |

अलाउद्दीन खिलजी मुहम्मदशाह द्वारा इस तरह के वचन सुनकर बहुत क्रोधित हुआ और उसने मुहम्मदशाह को हाथी के पैरों से कुचलवाकर मारने का हुक्म दे दिया | उसके सैनिको ने मुहम्मदशाह को हाथियों के पैरों तले रोंदवा कर मार डाला |
बाद में जब अलाउदीन खिलजी को अहसास हुआ कि ” मुहम्मदशाह अपने शरणदाता के प्रति कितना सच्चा वफादार व नमक हलाल निकला तो उसके मन में उस वीर के प्रति श्रद्धा के भाव उमड़ पड़े और उसने मुहम्मद शाह के शव को ससम्मान विधिवत दफ़नाने की आज्ञा दी |

एक और हम्मीरदेव चौहान ने अपने शरणागत की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व लुटाकर भी क्षात्र धर्म के शरणागत की रक्षा करने
के नियम का पालन किया वहीँ मुहम्मदशाह ने अपने शरणदाता के लिए अपना कुछ दांव पर लगाकर वीरगति प्राप्त की |

History & Literature

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s