महाकवी भुषन रचित शिवाजी नां कवित Mahakavi Bhushan shivaji kavit

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महाकवी भुषन रचित शिवाजी नां कवित

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कुरम कमल कमधुज है कदम फूल,
गौर है गुलाब राना केतकी विराज है,
पांडुरी पवार जुही सोहत है चन्दावत,
सरस बुन्देला सो चमेली साजबाज है,
‘भुषण’ भनंत मुचकुन्द बड गुजर है,
बधेले बसंत सब कुसुम समाज है,
लेई रस एतेन बेठीन शकत अहे,
अली नवरंग जेब चंपो शिवराज है.

उंचे घोर मंदर के अंदर रहन वारी,
उंचे घोर मंदर के अंदर रहाती है,
कंदमुल भोग करे कंद मुल भोग करे,
तिन बेर खाती सो तिन बेर खाती है,
भुषन शिथिल अंग भुषन शिथिल अंग,
बिजन डुलाती सो आज बिजन डुलाती है,
भुषन भनंत शिवराज वीर तेरे त्रास,
जगन जडाती सो आज नगन जनाती है.

छुटत कमान ओर तीर गोली बानके,
मुशकील होती मुरचान की ओट में,
ताही समय शिवराज हुकुम कै हल्ला कीयो,
दावा बांधी परा हल्ला बीर भट जोट में,
‘भुषण’ भनंत तेरी हिम्मत कहां लौ कहां,
किंमती ईहां लगी है जाकी भट जोंट में,
ताव दै मुच्छन पै कंगुरन पे पांव दै,
अरी मुख घाव दै कुदी पर्यो कोट में.

देवल गिरावतो फिरावतो निशान अली,
एसे सामे राव राना सब गये लबकी,
गौरा गनपती आप औरंग को देख ताप,
आपके मुकाम सब मार गये दबकी,
पीर पयगम्बरा दिगंबरा देखाई देत,
सिध की सिधाई गई रही बात रबकी,
काशीहुकी कला गई मथुरा मस्जीद भई,
शिवाजी नहोत तो सुन्नत होत सबकी.

ईन्द्र जीमी जंभ पर वडःव सुअंभ पर,
रावण सदंभ पर रघुकुल राज है,
पौन परिबाह पर शंभु रतीनाह पर,
ज्यों सहसबांह पर राम द्विजराज है,
दावा द्रुम दंड पर चिता मृग जंड पर,
भुषन वितंड पर जैसै मृगराज है,
तेजत्तम अंश पर क्रष्न जेम कंश पर,
त्यों मलेच्छ वंश पर शेर शिवराज है.

History & Literature

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