Daily Archives: August 8, 2015

सरोवर नी वेदना Sarovar ni Vedna

Standard

हुआ था उड उड हंसला, पांखु पसवारे,
जाण्युं चारे नई जडे, नवा ने निहारे.

पण एम के’वाय छे के जेदी सरवर सुकाणुं. अने हंसलो ई सरवर ने छोडी हाली नीकळवा नी तैयारी करतो’तो. तेदी’ ई सुकायेला सरोवरे पोकार कर्यो’तो के –

‘हेत नकामुं हंसनुं, विपत पड्ये उडी जाय,
साची प्रीत शेवाळ नी, जळ हार्ये सुकाय.’

‘ए हंसला, शुं तारो नातो आटलो ज हतो. ज्यां लगण मारा मां कह हतो न्यां लगण ज तोळुं हेत हतुं, बाप ? अने हवे, तुं मने मेली ने वयो जाछ ?’
पण हंसले तो सरवर नी आ वात ने सांभरी नो सांभरी करी, पांखुं फफडावी. डाया माणसे कीधुं के – ‘अरे हंसला –
‘हंसा, सायर मानवी, करीये हाथां जोड,
जेथी रूडा लागीए, एथी तणी म त्रोड.’

ए हंसला, स्वजन ने छांडी ने नो जवाय बाप ! नेह नी नेळ्य ने एम तोळी नो नखाय. जेनाथी सारा लागता होईए एने तो हाथ जोडीनेय मनावी लेवाय. अने हंसला, –
‘हंसा सायर सेवीये, जेनी जळ बरोबर पाळ,
ओछो राजा न सेवीये, जेनो उचाळो अंतरीयाळ’

पण हैया विहोणो हंसलो पांखु फफडावतो स्वार्थ ने पंथे उड्यो ‘खरररर खरररर खरररर’
पोस्ट – चमन गज्जर

History & Literature

Advertisements

नीर थोडुं प्रीत घणी- Dula Bhaya kag

Standard

**नीर थोडुं प्रीत धणी**

image

हंसला कोइ पीऐ नई पाणी रे…जी
प्रीत नी रीत पीछाणी…हंसला.

मानसरोवर कांठडे रेता उरमां शांती आणी रे जी (2);
आवी चड्यो त्यां कोइ शिकारी (2), तीर चडाव्या ताणी हंसला.1.

कालतणा भयथी ऐ भाग्या, आवी भोम अजाणी रे जी (2);
पांखुं थाकी पगडा डुक्या (2), देह तरसथी पीडाणी-हंसला .2.

अंगडे अंगडे अग्नी उपड्यो, आतम गती अकळाणी रे जी(2);
पाणी थोडुं त्यां नजरे पडता(2), जीवन आश बधाणी-हंसला.3.

‘काग’ पंखीनो प्रेम धणेरो, थोडुं हतुं ऐ पाणी रे जी (2);
‘तुं पी’ ‘तुं पी’ ऐटलुं बोलता (2), जीवन ज्योत बुजाणी-हंसला .4.

रचना:- कवि श्री दुला-भाया ‘काग’
टाइपींग:- लाभुभाइ गढवी.

History & Literature