एक राजपूत जिन्होंने अकाल में गौ रक्षा के लिए अन्नत्याग किया, “Hathisinhji Rayjada” Save Cows

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एक राजपूत जिन्होंने गौ रक्षा के लिए अन्न त्याग किया:-

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👉 गुजरात के केशोद के पास क

ा चांदिगढ़ गाँव,

रायझादा राजपुतो का गाँव, उस गांव मे हठीसिंहजी रायझादा का बडा नाम था |

👉 एक बार सौराष्ट्र मे भयंकर सुखा पडा,

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Hathisinhji Rayjada

👉 1 भरवाड 700 गायो को लेकर हठीसिंहजी के द्वार आया, और कहने लगा की, ” बापु ! आपका बहुत नाम सुना है और आपके ही भरोसे ये 700 गायो को आपको पास छोडने आया हुं. 8 दिनो से गायो को एक सुखा पत्ता तक नही मिला, बच्चे भुखे रहे तो कोई बात नही लेकिन इन माताजीओ का दुःख देखा नही जाता…..बोलते बोलते भरवाड की आंखो से आंसु की धार बहने लगी…

👉 हठीसिंहजी ने उससे कहा की, “भाई ! चिंता मत करो. माताजी सब ठीक कर देंगी, मेरे पास सब माताजी का ही दिया हुआ है, मुझसे जो बन पडेगा मे करुंगा |”

👉 ईतना कहते ही हठीसिंहजीने उनके बेटे हमीरसिंह को आवाज दी,

हमीरसिंह आये, “हां बापु ! आपने बुलाया ?”

“हां बेटा सुनो… हमारे घर आज माताजी आयी है, इन गायो ने 8-8 दिनो से कुछ नही खाया, बेटा ! चारे को काटकर लाने मे देर लगेगी, एक काम करो गायो को सीधे खेत मे ही चरा दो |”

हमीरसिंहने बिलकुल वैसा ही करा |

👉 फिर  हठीसिंह ने कहा, ” बेटा !हमे किसी की मदद मिले या ना मिले पर मेरे जीते जी ये गाये भूखी न रहने पाये, चाहे अपनी सारी जमीन क्यो ना बेचनी पडे |”

👉 हठीसिंहने माताजी को याद कर प्रतीज्ञा की कि, “जब तक जींदा रहुंगा अनाज का एक कण मुंह मे नही डालुंगा, लेकिन गायो को भूखी नही रहने दुंगा |”

👉 यह बात आग की तरह हर जगह फैल गयी और दुसरी  600 गाये हठीसिंहजी के यहां आ गयी | बापुने उन्हे भी अपने पास रखा, सुखे मे गायो की बहुत सेवा की |

👉 दुसरे साल बारिस हुई और सब मालिक अपनी गाये ले गये |

लेकिन जो टेक हठीसिंहजी ने ली थी वो नही भुले. ईस बात को 18 साल बीत गये. वृद्ध उम्र होने पर उनकी याददास्त कम हो गई, कई बार कहते की, ” बच्चो नहाने के लिये गरम पानी लाना”  लेकिन बच्चे कहते की, “बापु आपने तो नहा लिया है |”

👉 उनके बेटे और बहुए हंमेशा इस बात से डरते रहते की कही ‘बापु अपनी टेक, अपना वचन न भुल जाये और खाना ना मांग ले, तब हम क्या करेंगे?’

👉 लेकिन हठीसिंहजी सबकुछ भूल जाते लेकिन कभी अपनी प्रतिज्ञा नही भूले, कभी भूल से भी उन्हो ने अनाज खाना नही मांगा |

👉 18 साल प्रतिज्ञा का पालन कर  उनका देहांत हुआ || 🙏🏻

🔴🔴🔴🔴

🔹🔸आपके अमुल्य प्रतिभाव आवकार्य है 🔸🔹
हिंदी अनुवाद :- देवेंद्रसिंह वाळा

History & Literature

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