आद्यशक्ति Aadishakti

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छंद मनहर (कवित)

ॐ नमो आदि शक्ति, प्रभा परिह्ममकी तुं.
ईश्र्वरी अपार हो, अनंत लोक धारिणी.   |
सुद्धञान मागुंदान, अंतर हारो गुमान.
शरणागत जान देवि, सिंहपे सवारिणी.   |
चौदे भुवनो की मात, जग जश विख्यात गात.
कुबुद्धिको निवार, कोह मोह मान मारिणी.   |
वेगे चढ वार, धार आयुध कर मार पाप.
नेहसे निहार जरा हमको नारायणी.            १

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दु:खी तेरा बाल, करो ख्याल मात उसिका तुं.
दयाली कृपाली, दु:ख दुविधा निवारिणी.   |
पापको विनाश कर, तापको निवार मेरे.
भवसे उतार पार, तीनलोक तारिणी.   |
कालिका कृपाली, जग जननीजवाल मैया.
अभय कर कवियोंको, चारणो उचारिणी.    |
थार्यो कर जोडी कहे, सदा साथ मेरे रहो.
अनाथ- सनाथ करो, अधम उधारिणी.    २

रचना :- थार्या भगत
टाइप :- सामळा .पी. गढवी

History & Literature

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