थार्या भगत ना भजन bhajans by tharya bhagat

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भजन (1)
‬: सूर्य देव तमे जई कहेजो, संदेशो आ अमारो.
अनाथोना नाथ मुने, हवे ना विसारो.   टेक…

पश्र्विमथी सुमेरू जई, गोविंदने घणु कही.
स्वामीजीने संगे लई, तुं ऊगजे सवारो .   १

वेगे थी वैकुंठ दौडी, कहेजो कर जोडी जोडी.
हठीला हरि हठ छोडी, पल भरमां पधारो.   २

हाल अमारा घणा कही, लालजीने आवो लई.
भवो भव हुं भूलुं नहिं, उपकार तमारो.     ३

एक वार न माने हरि, तो कहेजो करगरी फरी.
थार्यो कहे महेर करी, मारो वियोग टारो.    ४

भजन (2)
जदुपति जीवन मेरा तेरी कला न्यारी.  टेक

गज की पुकार सुनी वेगसे पधारे.
खग के पति को मग में छोडा मुरारी.  १

सुरपति कोप करी व्रज जन को सतायो.
कमला पति करपे गिरिवर धारी.  २

रमे रास गोपी संग रहे ब्रह्मचारी.
रति केरो पति जहां हिमत गयो हारी.  ३

पराशर सुत तेरो पार न पावे.
थार्यो जावे अकथनीय लीला पर वारी.  ४

भजन(3)
नीशदिन नीरभरे नयन हमारे, नयन हमारे बहुत दुखारे.   टेक
करभये पावन तेरी सेवा करी स्वामी.
पांव सफल किये तीरथ तुम्हारे.     १

श्रवण पवित्र तेरा यश सुनी जगपति.
रसना निहाल तेरो नाम पुकारे.    २

मन पावे मौज तेरो मनन करी माधवा.
बुद्धि निर्मल निज काज सुधारे.   ३

थार्यो कहे मेरी अभागिनी आंखे.
धर्शन काज दशों दिशा निहारे.  ४

भजन (4)
तुम बडे दाता मेरी दीनता निवारी,
दीनता निवारी प्रभु मेरी दीनता निवारी. …  टेक

जो संपदा मैने स्वपने न देखी.
ऐसी अमीरी मुज को दीन्ही मुरारी. …  १

भूपन को भूप मुजे बना दियो भूधरा.
ऐसी पदवी का मैं तो न था अधिकारी. … २

अलौकिक दान तेरा न जाने मन मेरा.
कल्पांते खजाना तेरा खूटे ना खरारी.  … ३

थार्यो कहे मेरा मोजीला माधव.
अविचल दशा ऐसी रखना हमारी.  … ४

भजन (5)
मन ना मोजीला हरि, मोरली वारा,
मोरली वार हरि मेरे नयनो का तारा.   टेक

सेवक तेरा अनेक एहि जग मांहि.
मेरा तुंहि एक प्रभुजी प्रीतम प्यारा.    १

खूब ज तपासिु मैने दिल मही देखा.
आप बिना कोई और न दीखे आधारा.    २

तुटा जल बीच में जहाज है हमारा.
करूंणा करो तो नाथजी मिलेगा किनारा.   ३

थार्यो कहे अब तो दर्शन द्यो तुम्हारा.
संकट समे में स्वामी मत करो मुंह टारा.   ४

भजन(6)
राम बिना सुख स्वपने नाहिं, क्यों भूले गाफिल प्रानी रे.  टेक

धन यौवन बादल की छाया, देख देख तुं क्यों ललचाया.
माटी में मिल जावे काया, रहे न एक निशानी रे .… राम बीना…

उपदेश देवे सन्त सुजाना, थके पुकारी वेद पुराना.
किरतारने तुजे दियादो काना, अजहु रहे अञानी रे… राम बीना…

मिथुनाहारमग्नमतिमन्दा, और सार समजे ना अन्धा.
अपनी भूलसे आप हि बन्धा, पडे चोरासी खानी रे…राम बीना…

थार्यो कहे छोडदे आशा, जूठा है सब भोग विलासा.
दो दिनका ये देख तमासा, आखर है सब फानी रे.…      राम बीना …

रचना – थार्या भगत
टाइप – सामरा गढ़वी

History & Literature

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