भजन – दास सतार Bhajan by Daas Sataar

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भजन(1) 🌻
🙏 मालुम नहीं रहेणी बीना घर दूर 🙏

मालुम नहीं रहेणी बीना घर दूर,
कलीयुग में कहेणीके बहोत मजूर.

शुरवीर होय ते सन्मुख लडे ने, कायर भागे दूर,
प्रेम पियाला कोई मरजीवा पीवे, नीत रहे चकचूर.
                    कलीयुग में कहेणीके बहोत मजूर…(१)

काम क्रोध मद लोभ मोह के, नाम पे डाल दे धूल,
पांच को मार पच्चीस को बस कर, मुख पर बरसे नूर.
                        कलीयुग में कहेणीके बहोत मजूर…(२)

ये हंसा का कया हय भरोंसा, उड जावे जयुं कपूर,
दास सत्तार भजो भय भंजन, साहेब हाल हजूर.
                      कलीयुग में कहेणीके बहोत मजूर…(३)

भजन(2)

सुख और दु:ख में आनंद रहेवे
हरदम हरगुण गावे
साधु वो नर हमको भावे…टेक

परनारी परधन को त्यागे, सतकी रोजी खावे,
तनमन और बचन सें कोइ, जी को नांही दुभावे. …साधु वो…

करे सेवा संसार की उनको, साची राह दिखावे,
धर्म करतां धाड आवे तो, हिंमत हार न जावे. …साधु वो …

परदु:ख भंजन होकर रहेवे, गुरू गोविंद गुण गावे,
दास सत्तार गुरू गोविंद मिलकर, काल को मार हठावे … साधु वो…

भजन(3)

मनुष्य देह मळ्यो अति दुर्लभ मोंघा एना मूल
मनवा लइ लें ल्हाव अमूल…टेक

षडरिपुओना संग तजीनें सेवाभक्ति शणगा सजीने.
निशदिन नाम प्रभुनुं भजीनें प्रेम हिंडोळे झूल. …टेक

मिथ्या मायामां मनडुं मोयुं विपरीत मार्गे आयुष्य खोयुं,
मुर्खा फरी पाछुं नव जोयुं ए ज छे मोटी भूल. …टेक

नही करवाना कर्म करीने पाप कमाणीए पेट भरीने,
परनारीथी प्रीत करीनें लाखो थइ ग्यां डूल…टेक

आ अवसर पाछो नही आवे अभिमाने शीद बाजी गुमावे,
सत्तार शाह साचुं समजावे फूलणशी मत फ़ूल. …टेक

रचना :- दास सत्तार
टाइप :- सामरा पी गढवी

History & Literature

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