नवरात्री दूहा- छंद/ Navratri Duha Chhand

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आजे छठ्ठु नोरतु छे ते निमिते श्री देवदान देथा जी नी एेक रचना माणीये

🌻 शकित सकल मिल रास सजे🌻
            छंद रेणंकी
राजत पट सधर नीलंबर अंबर, धर नव सत सणगार धरे
फररर पर थंभ ध्वजा वर फरकत,  जरर जरर प्रतिबिंब जरे,
लरलर उर हार गुलकके लरकत ,सिर पर गजरा कुसम सजे ,
परगट धर सधर मानसर उपर, शकित सकल मिल रास, सजे.जी. १

झंझर धुन झणण झणण गत झणकत गणणण घुघर पाय घुरे
तणणणणण तंत्त बाजते तंबुर, सणणण गावत मधुर सुरे,
थणणण थैकार भयो जब थैतत, गणणगणण जब धरण गजे,
परगट धर सधर मान सर उपर , शकित शकल मिल रास सजे.जी.  २

कटकट गये विकट दु:ख संकट धिन कट बाजत तबल धुनी,
जटपट जगमात फिरत फरगट जित सिरत्रट सुरथट आयसुनी,
धिधिकट धृकट धृकट कट ध्राकट, बिकट उलट मरदंग बजे,
परगट धर सधर मानसर उपर,  शकित सकल मिल रास सजे.जी.३

झमझम कर झांझ बाजते रमजम, कम कम कोर पीठ कमं
समसमसम भेद वेद वत संगीत, ठमठम ठमकत मेध ठमं,
गमगमगम घोर घुमड धन गरजत,  धमम धमम धम भोम ध्रुजे,
परगट घर सधर मानसर उपर, शकित सकल मिल रास सजे.जी.४

सरसत रंग रचत सपत सुर साधत, गमन परत गत अगम गती,
सरसत पद कमल विमल रज परसत, तरत नमत तब अमर पती,
चितवत नित जगत भगत चरनन चित, रमत जमत अत ललित रजे,
परगट घर सधर मानसर उपर, शकित सकल मिल रास,सजे.जी.५

बनठन सुरनार करत तव वंदन, थनगन थनगन होत थनं,
धनधन धन रमन रच्यो सोई दिन धन, भन भन जयों नरनार भनं,
मन मन तन मगन भुवन त्रय निज मन, गानतान सुन गगन गजे,
परगट घर सधर मानसर उपर, शकित सकल मिल रास,सजे.जी.६

खळ हळ भुज चुड उजळ अति खळकत, कुंडल प्रबल प्रकाश करं,
जळळळ मुख नुर सुर सम जळहळ ,भळ हळ भळ हळ तेज भरं,
लळवळ नग जोत विमळ मनी लळकत , भ्रुकुटी मंगळमय भीडभजे,
परगट घर सधर मानसर उपर, शकित सकल मिल रास ,सजे.जी.७

हसरस नव दरस परस पर हसबस,  सरस संपुरण रास भयो,
बरसत सुर सुमन वदन जय बोलत,  सब दिस हुलस हुलास छयो,
सेवत विधि इश शक्र हरि सेवत, “देवीदास ” पुनि दसॅ दिजे,
परगट घर सधर मानसर उपर, शकित सकल मिल रास ,सजे.जी.

             ❄-  छप्पय -❄
रमत रास सुर राय,  सरस श्रृंगारही सज्जे,
गाय गीत सगीत, बीन मरदंग सु बज्जे,
घुघर बाजत गमक,  धमक पायन धर ध्रुज्जे,
झांझर अति जमकंत,  भनक सुन सकंट भज्जे,
जयकार संत सुरनर जपत, गगन बीच नोबत गजे,
कर जुगल जोर “देवो ” कहे, शकित रास इन बिध सजे
(श्री देवा विलास अने सुबोध बावनी //श्री देवीदान जी देथा )
साभार-गढवी कमलेश आर. (कच्छ)
जय माताजी

History & Literature

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