Jaykar aabhe thi thayo / जयकार आभै थी थयो…

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.          जयकार आभेथी थयो
.               छंद : गीतिका

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हे दिनदयाळी खरी माँ खोडल प्रणमु आपने,
कष्ट सघळा कापती खमकारती भव तापने,
पाप ने बाळी उजाळी बाळ संभारी लयो,
धा सुणी ने धोड़ती जयकार आभेथी थयो…1

झालर झणकी नाद नोबत नगारे दांडी पड़ी,
शंख गुंजत डाक बाजे खंजरी खणकी खड़ी,
आरती नित आपता जप जापता जाग्रत रयो,
साद सांभरती सदा जयकार आभेथी थयो…2

भाल त्रिपुंडी तिलक सोह ओढियो शिर भेळियो,
वेढ हेमर कान कुंडळ नाक नथ्था सेरिओ,
हत्थ त्रिशूळ कंठमां फुल माळ फोरमती दयो,
थान अहयावेज माँ जयकार आभेथी थयो…3

विपत हरणी चारणी तम धारणी नभ ने धरा,
वा बनी विचरे भुवनमा यगन अगनी थई भरा,
दोर जीवननो धपावा भरत जलधारा भयो,
पंचतत्वों आप ही जयकार आभेथी थयो…4

जागती ज्योति जगतनी भगतनी भवतारणी,
राक्षसो मारी रगतनी धगत चख राता तणी,
लगत व्योमे लेय ताळी रास अनंत रचावयो,
निसरता नवलख त्यां जयकार आभेथी थयो…5
– दिव्यराजसिंह सरवैया कृत

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