Togaji Rathore / तोगारी तलवार

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तोगाजी राठोडः

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कटारी अमरेशरी(१),तोगारी(२) तलवार;
हथ्थल रायां(रायसिंहजी) संघरी(३),दिल्लीरा दरबार.
प्रस्तुत दोहे मे ३ क्षत्रीयो जीन्होने दिल्ली के बादशाहो को अपनी शक्ति हतप्रभ कर दिया,
जिसमे
(१)अमरसिंह राठोडःनागौर के राव अमरसिंह ने अपनी कटार से शाहजहा की कचेरी मे शाहजहा के साले सलाबत खां को मारडाला,और शाहजहा खुद को जेसे तेसे बचा कर भागा। (काठीयावाड ग्लोरी मे यह स्टोरी रखी गइ थी। )
(२)तोगाजी राठोडःआज कि हमारी वार्ता के नायक जिन्होने राजपुतो का सिर लडने के बाद भी धड युध्ध कर सकता हे ये साबित करने के लीये खुद का सिर कटाकर यवन सेना पर हमला कर दिया और अपनी तलवार से कइ यवनो को समाप्त कर दिया।
(३) रायसिंह जालाः काठीयावाड के धांग्रधा के रियासत के रायसिंहजी जाला अकबर के आमंत्रण पर दिल्ली गये थे ,वहा उन्होने अकबर के एक शक्तिशाली मल्ल(पहेलवान)को अपने हथेली के पंजे से पकडकर दिवाल पर पटक के मार दिया।
इ.स. १६२० से १६३८ के मध्य कि हकिकत हे यह कथा..
तब जोधपुर मे महाराजा गजसिंह का शासन था और तोगाजी राठोड रोहिण्डी ठिकाने के जागीरदार थे।
दिल्ली के दरबार मे कचहरी मे कोइ प्रश्न या विषय पर चर्चा विद्वानो मे होती रहेती थी।
उस समय मे भी एसी हि एक सभा मे जीसमे ७० खान, ७२ उमराव अन्य सरदार, दिवान, मंत्री, पटावत, पटावरी, काजी, पंडित अपने नियत स्थान पर बिराजमान थे। दिल्ली का शहनशाह शाहजहा मयुरासन पर बेठा था।
शहनशाह बोलाः “तुम खान, उमराव लोग सब मेरे दरबार मे शामील हो, मुजको एक एसा सवाल हुवा हे कि मुसलमान बादशाहत होने के बावजुद यहा पहले से ७२ हिन्दु उमराव और ७० खान क्यो? संख्या मे खान कम क्यो हे?
बादशाह के एसे वचन सुनकर अंतवेद जील्ले का सुबा मीर खानजा खान खडा हुआ उसने कहा कि दो काम हिन्दु कर सकते हे वो मुसलमान नहि कर सकते इस कारण हिन्दु उमरावो कि संख्या ज्यादा हे,
वो कोन सी दो बाते मीर? आप मुजे सुनाओ.. जो सिर्फ हिन्दु हि कर सकते हे.. आपको पुरी खातरी हे क्या..?
खानजाः बराबर खातरी हे, और मे हिम्मत से कह भी सकता हु. वो दोनो बाते खुली हि १)राजपुत अपना सर धड से अलग होने के बाद भी लडते हे और २)और इनकी पत्नी चीता मे उनके साथ जलकर सती होती हे
शाहजाहा न कहाः तो आपको यह दिखाकर भी साबित करना होगा तुम को छह माह दिया जाता हे, वरना तुम को मार दिया जायेगा और तुम्हारा शब शाहि हवाल किया जायेगा।
मिरखानजा को हुवा यह बादशाह का केसा काम? सवाल करना और जवाब से हठ कर परेशान करना? सिर्फ इसी कारण से मे किसको मरने के लीये तैयार करु..?

“जो नृपपै अधिकार ले,करे न पर उपकार;
तौ ताके अधिकार मे, रहे ना आदि ओमकार”

जोधपुर के महाराजा गजसिंह भी सभा मे मोजुद थे उनको बादशाह के वर्तन से खेद हुआ कि क्षत्रीयो कि विरता कि बाते उजागर करने से मिरखान आफत मे आ गये..उन्होने मदद देने कि ठानी और अपने मुकाम पर आये और सभी उमरावो को निमंत्रण दिया..और साथ मे मिरखान जी को भी निमंत्रण देने के लीये चोबेदार को भेजा..!
नियत समय पर सभी इकठ्ठे हुए. और महाराजा ने क्षत्रीयो के सभा मे कहाः
“आपणा हघळा राजा लोग आजरा दरबार मे हाजर हा, अर आपाणा हघळांरी हजुर में, या मीर खानजा खानरी सघळी बाते बादशाहसुं से हुइ. इण मे मीर साहबरो कोइ बातरो लाभ हो नहि, परंतु मात्र राजपुंतरो राजपुतणो मुसलमान से तेज हे, इतरो दिखवाणरा बास्ते इनोंने बादशाहसुं सघळी हकिकत हि सों करी, जीससे बादशाह नाखुश हुयगो. अर खानजा को ६ महिनो्मे हकिकत सत्य करके दिखवाणरो कह्यों. इससे आपणे इण बाबत ने मिरखानजी कि मदद करणी हे। ”
सभी उमराव सहमत थे इससे खानजा सरदार बोलेः
“हुजुर! खुदा सच कि साथ मे रहता हे, अगर यह बात सच ना होती तो आप के दिलो मे मेरे लीये इतनी महेरबानी कहासे होती”
इस सभा के बाद सभी अपने मुकाम पर गये थोडे दिनो मे महाराजा गजसिंह और मिरखान जोधपुर मे मीले।
काछद्रढा, कर बरसणा, मन चंगा, मुख मिठ्ठ;
रणसुरा, जगवल्ल्भा, सो मे बिरला दिठ्ठ
जोधपुर दरबार मे सभी सरदार उपस्थीत थे, और क्षत्रीयो को अपना सर कटाकर युध्ध लडने का बिडा फिराया गया तीन बाद बिडा फिरने पर विर तोगाजी राठोड खडे हुए उन्होने कहा कि मुजे विश्वास हे कि मेरा सर कटने के बाद भी धड लड सकता हे, परंतु मारो लग्न होवो कोय नहि,जीणसु मोरे पीछु सती होनेवाला कोइ नहि. मे शीर उतारने लडवारा बास्ते मे या बीडा उठावुहु.
महाराजाः “रंग हे, थाने रंग हे जाजा रंग हे..” तोगाजी कि शादि के हेतु एक और बिडा सभा मे फिराया गया, और ओसिया के एक भाटी कुल के सरदार ने वो बीड़ा उठाया और अपनी पुत्री का बियाह तोगाजी से निश्व्त किया,
भाटी कुल री रीत ,आ आनंद सु आवती !
करण काज कुल कीत, भटीयानिया होवे सती !!

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