Daily Archives: April 25, 2016

सुविचार

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श्रोत्रं श्रुतेनैव न कुंडलेन ,
         दानेन पाणिर्न तु कंकणेन।
विभाति कायः करुणापराणां,
         परोपकारैर्न तु चन्दनेन 💐
भावार्थ – कानों की शोभा कुण्डलों से नहीं अपितु ज्ञान की बातें सुनने से होती है । हाथ दान करने से सुशोभित होते हैं न कि कंकणों से तथा शरीर चन्दन से नहीं बल्कि दूसरों का हित करने से शोभा पाता है अथवा कुण्डल, कंकण और चन्दन से अलंकृत शरीर भी तभी शोभास्पद है जब इस शरीर के  माध्यम से सत्संग, दान और परोपकार निरन्तर होते रहें 💐
आपका आज का दिन परम् प्रसन्नता से सम्पन्न रहे, इस शुभकामना के साथ 
आदेश सुप्रभात