☆●वांकानेर नागाबावा नो इतीहास●☆

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☆●वांकानेर नागाबावा नो इतीहास●☆

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राज वखतसिंहजी ना वखत मां कोइ ऐक नागाबावा नाम ना योगी वांकानेर मां आव्यां हतां ; तेवो ना अपूर्व चमत्कार जोइ राज वखतसिंहजी ऐ तेमने गुरू मान्या अने आग्रह पूवँक वांकानेर मां राख्यां , ऐ महात्मा त्रिकाल दशीँ,  वचन सिद्ध वाणा तेमज घणा वखाणवा लायक त्यागी हतां ।।

तेमना उपर राज साहेब नो ऐटलो बधो प्रेम हतो के तेवो नामदार तेमने केटलांक उतम वस्त्रों तेमज शाल दुशालाओ आपतां,  परंतु नागाबावा ऐ तमाम पोतानी पासे जे कोइ साधु संत आवता तेमने आपी देता , अने पोते तो निरंतर दिगंबर दशा मां ज दिवसो वितावता,  मात्र ज्यारे दरबार मां आवता त्यारे ज पग सुधी लांबो भगवो झब्बो पहेरता ।।

महाराजा राज साहेबे तेवो ने चडवा माटे ऐक उतम घोडी आपी,  ऐ नागाबावा ऐ पगपाणा आवता ऐक साधु ने आपी दिधी,  आ रीते अनेक वस्तु ओ महाराजा राज साहेब तेमने आपतां,  छतां ते तो हमेशां त्यागी ने त्यागी ज रहेतां  ।।

आथी नामदार राज साहेब ना कामदार वोरा हंसराज नागाबावा ऊपर धणो ज द्वेष राखतां अने ऐथी ज ऐमणे उक्त महात्मा नां खोटा छिद्रो जोवा पोताना अमुक माणसो ने रोक्या हतां,  नागाबावा ऐक दादा खवास नामना माणस नी स्त्री पूरजाइ ने धमँ नी माता मानी तेने त्यां दररोज जतां , अने माता नी पेठे प्रेम करी तेमने धावता हतां,  पूरजाइ पण तेने पोताना पुत्र पेठे मानी धवरावता , जो के ऐ पूरजाइ पुख्त उमर ना होवाथी ऐमनुं धावण सूकाइ गयेलुं हतुं,  तो पण जाणे तुरंत मां ज बाणक जन्म्युं होय तेम धावण नी शेडो छुटती हती,  आ बनाव ने वोरा हंसराजे जुदा रूपमां गोठवी नामदार राज साहेब हजुर जाहेर कर्युं के तमारा गुरू ने पूरजाइ नाम नी स्त्री साथे आडा संबंध छे ।।

जो के ते वात राज साहेब ना मानवामां न आवी,  तो पण विशेष खात्री अर्थे तेवो नामदारे पोतानां प्रतिष्ठित अने विश्र्वासुं माणसो ने ऐ बनाव नजरें जोवा सुचना करी ,  फरी ऐक दिवसे ज्यारे नागाबावा धावता हतां,  त्यारे नामदार राज साहेब नां माणसो ऐ छुपी ने जोयुं तो नागाबावा मात्र छ महिना ना बाणक जेवडा ज हतां,  अने पूरजाइ ना खोडा मां पडयां पडयां धावता हतां,  आ अपूर्व चमत्कार नी वात श्रीमान राजसाहेब ने मणतां तेवोनी भक्ति नागाबावा साथे द्वढ थइ ।।

वि,स, 1901 ना अरशा मां महाराजा राज वखतसिंहजी ज्यारे द्वारीका नी यात्रा ऐ पधायाँ त्यारे नागाबावा पण साथे हतां,  वणतां सहुं जामनगर ना महाराजा जाम विभाजी ना मिजबान बन्यां,  महाराजा जामसाहेब ने धमँनिष्ठ जोइ प्रसन्न थयेलां नागाबावा ऐ तेवोने कह्युं के

” हुं तारे त्यां जन्म लइश ”

महाराजा जामसाहेबे धणी ज नम्रता थी प्रणाम करी कह्युं के
” मारां एवां भाग्य क्यांथी के आप मारे त्यां जन्म लीओ ”

कचेरी मां बेठेलां तमाम माणसो ऐ : ऐ वखते प्रत्यक्ष नहीं बोलतां नागाबावा नी वात ने हसी काढी ;  परंतु महाराजा जामसाहेब ने ऐ महात्मा ना वचन उपर द्वढ विश्र्वास बेसी गयो , महाराजा राज वखतसिंहजी तथा नागाबावा वगेरे वांकानेर आव्यां,  त्यार बाद थोड़ा वषँ पछी नागाबावा ऐ पोताना तप नी पूणाँहुती करी धणा ब्राह्मणो ने तेमज साधु संतो ने जमाडयां अने पोतानी पाषाण मूर्ति पोतानी हाजरी मां ज कडीया ओ पासे तैयार करावी,  ऐक मकान चणाववा मांडयुं ऐ पछी ज्यारे तेवो अग्नि प्रवेश करवा तैयार थयां त्यांरे महाराजा राज साहेबे तेवो ने तेम करतां अटकाव्यां परंतु पाछण थी कोइ न जाणे तेम चुनानी भठ्ठी करवाने बहाने ऐक मोटी खाइ खोदावी अने तेमां छाणां लाकडां पूरावी थोडा धणा सुखड नां काष्ठो पण नखाव्यां ऐनी अंदर ब्राह्मण जमाडवा ने समये अगाउ थी मंगावी राखेला धृत ना कुडला ओ रेडी अग्नि ने प्रजवलीत कर्यो अने तेमां रात्रि नां बार वागता नी साथे ऐक मोटा छरा थी पोतानुं मस्तक पोताना हाथे छेदी होम्युं,  पछी थी ऐ महात्मा नुं धड पण जाज्लय मय अग्नि मां जइ ने पडयुं,  ऐ वात नी महाराजा राज साहेब ने जाण थतां तेवो ने महान खेद थयो ।।

नागाबावा जीवित हुताशन मां प्रवेश कर्यो ऐ पहेला ऐक चीठ्ठी लखी गया हतां के ,

” हवे हुं महाराजा जामसाहेब ने त्यां जन्म लइश,  मारू नाम धन राशि उपर रहेशे ”

“मारो विचार पूणँ राज्य करवानो हतो ”

परंतु आपे मने अग्नि प्रवेश करता अटकाव्यो अने मारा मनोरथ मां ऐक वषँ नुं विग्घ नांख्युं, ऐथी हवे हुं पूणँ राज्य नहीं करी शकुं  ; मारी अन्तिम अवस्था योगी जेवा आचरण मांज व्यतीत थशे ”

ऐ चीठ्ठी वांची महाराजा राज साहेब ने वधारे अफसोस थयो , जे दिवसे नागाबावा ऐ जीवित हुताशन मां प्रवेश कर्यो तेज दिवसे जाम विभाजी नां मोटां राणी धनबाइ ने गभँ रह्यो अने पूणँ मास थतां वि,स, 1913 ना कारतक वदि 6 ने दहाडे पुत्र अवतर्यो अने तेमनुं नाम भीमसिंहजी  (काणुभा ) राखवामां आव्युं ।।

☆▪आ वात नी पृष्टि आपनार  भुटान्त नाम ना भविष्य प्रकाशक पुरातन ग्रंथ मां लखेलुं छे के वि,स, 1901 मां कोइ धैर्य वान राजा भेख लेशे अने ते निवाँण पद ने पामी सदाकाण दिगंबर रहेशे, वचन मां रिध्धी-सिद्दी वाणा अने त्रिकाल दशीँ ऐ महात्मा जाम विभाजी पासे आवी केटलीक आगम वाताँ कहिं अंत मां कहेशे के तारा जेवा धमीँष्ट राजा ने घेर पुत्र बनी आववा नी मारी इच्छा छे ।।

वणी ऐज ग्रंथ मां अमुक पेरेग्राफ ने अंतरे लखेलुं छे के वि,स,1913 मां उपर कहेल नागाबावा वांकानेर मां जीवित हुताशन प्रवेश करशे अने ऐज साल मां जामसाहेब विभाजी ने घेर पुत्र जन्म लेशे अने तेमनुं नाम धनराशि ऐ धारण करावाशे ।।

संदभँ,,,झाला वंश वारीधी

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