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☆●राजराणा अजाजी नुं मेवाड माटे बलीदान●☆

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☆●राजराणा अजाजी नुं मेवाड माटे बलीदान●☆

स्थापी हणवदे राजधानी राज रायधरे !
तेना त्रण पुत्र मां अजोजी हतां अग्रणी !
लधुभ्रात राणाजीने आपी गादि आप !
अनुज सजाजी साथ आव्या मरूभू भणी !
सुभट शिरोमणि गणी ने मेदपाटेश्र्वरे !
जागीरे जमीन धणी सोंपी सादडी तणी !!

श्री हणवद नी राजधानी नुं स्थापन करनारा राज रायधरजी ना त्रण कुमार मां मोटा कुमार अजोजी ऐ राज रायधरजी ना कैलाश वास थया बाद तेमना लधुबंधु राणाजीना हाथ मां राज्य नी कमान सोपी सहोदर सजाजी साथे चौद हजार नुं लश्कर लइ हणवदे थी मारवाड तरफ प्रयाण कर्यु त्यारे उदार प्रकृतिवाणा अजाजी नी कवि ऐ प्रशंसा करता कह्युं छे  !!

कइ बीगा धर लागे हट बन्धन लडे !
राणा राणक ने राज आयो मुरधर देश अजो !!

चुंडे गढ चितोंड भड समपे लधु भ्रातमें !
यू हणवद आरोह आप ह्रात समपे अजा !!

कुंभलगढ ना महाराणा रायमलजी  ना माणसो अत्यंत आग्रह पूर्वक सर्व ने कुंभलगढ तेडी गया  !

राजराणा अजाजी ना शौर्य धैर्य अने धर्म आदिनुं अवलंबन करनारा वाक् चातुर्य थी महाराणा रायमलजी नुं मन बहुं प्रसन्न थयुं तेवो ऐ श्रीमान अजाजी ने राजदरबार मां प्रथम दरज्जा नी बेठक अर्पण करी अने अजमेर नी राजधानी आपी अपूर्व हर्ष थी हजूर मां राख्यां !!

महाराणा रायमलजी नो कैलाशवास थतां तेवो ना पुत्र सांगाजी चितोंड नी राजगादी ऐ बेठा त्यार बाद दशेक वर्ष पछी (वि, स, 1576 )  मां मुहमदशाह सानी तथा बादशाह  बाबर साथे भयंकर युद्धों थयां तेमा राजराणा अजाजी ऐ ऐटली बधी वीरता बतावी के महाराणा सांगाजी ऐ श्रीमुखे तेवोनी सर्वोत्कृष्ट शब्दों थी स्तुती करी  !!

महाराणा सांगाजी ऐ धणी वार बादशाह बाबर ने केद करी कारागार थी मुक्त करेल हतो ऐ वख्ते कोइ कविऐ आवुं कहेल !!

शाहां पकड छोडवो सांगा थारे हांसा खेल हमीर हरां  !!

वि,स, 1594  मां बाबर बादशाहे पचास हजार नुं सैन्य लइ मेवाड उपर चडाइ करी ऐ वखते महाराणा सांगाजी पण बे लाख सैन्य लइ रणभूमी मां पधार्या अने बिआना -भरतपूर तथा पीलाखाल आदि स्थणो ऐ विजयवाध् वगाणता फतेहपूर -सीकरी  मां यवन सेनानी सन्मुख पहोच्यां सैन्य मां भयंकर युद्ध नो आरंभ थयो !!

बाबर आग्रा अने सीकरी थी आगण वधी महाराणा ना सैन्य सामे युद्ध करवा लाग्यो ऐ वखते राजस्थान ना तमाम राजाओं महाराणा नी साथे मणेला  हता !!
वीर क्षत्रियो ना प्रबल प्रहार थी पोताना सैनिकों ने व्याकुण बनेला जोइ बाबरे महाराणा सांगाजी ने ऐक संन्धीपत्र लखी मोकल्यो तेमा पीलाखाल अने बिआना ऐ बे राजधानी ना मध्यप्रदेश मां सीमा नियत करवानुं लखेलुं हतुं ऐ उपरांत बाबरे महाराणा ने कर आपवानो पण स्वीकार कर्यो हतो ऐटलुं ज नहीं पण ऐ वखते महाराणा जेम कहे तेम बाबर करवा तैयार थइ गयो हतो लडाइ चालु हती !!

परंतु भावीयोगे ऐक सेनापति राजद्रोही निकणता महाराणा नुं सैन्य पाछुं हट्युं  महाराणा सांगाजी पण धणा धायल थयां  ऐ वखते मेवाड ना केटलाक प्रतिष्ठित सरदारो ऐ ऐकत्र थइ महाराणा ने रणक्षेत्र थी अन्य स्थणे मोकली आपवा अने तेमना प्रतिनिधि तरीखे संलुवर ना रावत रतनासिंहजी ऐ शत्रु सामे युद्ध करवुं तेवो निश्र्चय कर्यो  त्यारे राव रतनासिंहजी ऐ कह्युं के मारा पूर्वजों ऐ महाराणा ने राज्य सिंहासन अर्पण करेल छे तेथी तेनो फरी अंगीकार हुं नही करी शकु महाराणा ना प्रतिनिधि बनी हस्ती पर आरूढ थनार नी सेवा बजाववी ऐज मारू कर्तव्य छे अने प्राण जाय तो पण आपणा सैन्य नी अंदर प्रतिपक्षीओने पेसवा नहीं दउं आ मारी द्रढप्रतिज्ञा छे  !!

ऐवा वखते श्रीमान राजराणा अजाजी के जेवो हणवद नां सधणां राज्य चिन्ह थी सुशोभित होवा उपरांत महाराणा ना ताबेदार महिपतीओमां प्रथम दरज्जा नुं मान भोगवता हतां तेवो सलुंवर अने डुंगरपुर आदिना अधीश्र्वरो नी अनुमती थी मेदपाटेश्र्वर  (मेवाडनरेश -महाराणा )  ना समस्त राज चिन्हो ने धारण करी अरीदण सन्मुख उपस्थित थया राजराणा अजाजी पोताना सेकंडो सरदारो बीजा केटलाक प्रतिष्ठित सरदारो अने सैन्य सहित असंख्य यवनो नो संहार करी स्वर्ग मां सिधाव्या  !!

साहां सिर सांगेण साझ चतुरंग सवाइ !
ऐकलाख असवार पैदलां गणत न पाई !!
सझउत बब्बर साह राड सीकरी सचावे !
सुख पोढे संग्राम जोर पतशाह जणावे !!
उण वखत सलाकार उमरा,
छत्रअजा शिर साजियो !
मुरातब ले गजचढ मयन्द युंकडतल अग्राजियो  !!

उत बब्बर असपती अठीझालो अजरायल !
उडे रीठ उण बार धणां प्रसणा कर धायल !!
पडधर सहस पचास मेछ धर पारन मंडे !
कडतलजुद्ध कठोर बला खगझाटके !!
सझ फतेराण संग्रामरी पख अछूतो पावियो !
नव सहस सुभट लेकर नडर सुरपुर दिसा सिधावियो  !!

☆● ऐ युद्ध मां डुंगरपुर ना अधीश रावल उदयसिंहजी संलुवर ना अधीश राव रत्नसिंहजी मारवाड ना राजकुमार राठोड राजमलजी सोनगरा रामदासजी पवाँर गोकलदासजी माणकचंदजी तथा चंद्रभाणजी चहुआण अने ऐ सिवाय ना धणा सरदारो काम आव्या  !!
राजराणा अजाजी ना कुमार सिंहजी तथा भाइ सजाजी अंत्यंत धायल थयेला  !!

संदर्भ – श्री झालावंश वारीधी
पोस्ट – झालावाड