शिव अवतार वंदना

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.      *रचना:जोगीदान गढवी (चडीया)*
*दक्ष यग्न रग दोळवा, तांडव रचियो तद्र*

*जटा लट्ट से जोगडा, भयो नाथ विर भद्र*01
हे भगवान महादेव आपे दक्ष ना यग्न मा सती ना दहन थी क्रोध करी ने जटा नी एक लट तोडी विरभद्र अवतार धर्यो अने तांडव रची दक्ष नुं मस्तक छेदी नाख्युं तथा बधा देवो नी विनवणी थी तेने बकरा नुं मस्तक आप्युं आपना विरभद्र अवतार ने मारा वंदन छे.

*शनी पछाड्यो शंकरा, आभलीये थी आप*

*जग्ग तणां सौ जोगडा, बाळ उगार्या बाप*02
हे भगवान शंकर दधिचि ना पुत्र तरीके आपे पिपलाद अवतार धर्यो अने दधिचि आप ने मुकी ने निकळी गया..पिपळा ना पान सेवी ने आप मोटा तपस्वि थया ने पुछ्युं के मने केम बाळपण मांज पिताये छोडी दिधो अने जांणवा मळ्युं के शनि नी द्रस्टी ने कारणे ने त्यां आपे तेने ग्रह मंडळ थी हेठो फेंक्यो तप ना बळे..पण बधानी बहु विनती ते कोयदी जन्म थी सोळ वरस सुधी ना बाळक ने नही हनेडे ते सरते छोडी जगत ना बाळको नुं कल्यांण कर्युं आपना पिप्पलाद अवतार ने मारां वंदन छे..
*तपस्या जद ब्रह्मा तप्या,प्रगट्या सुंणी पुकार*

*जडधर धरियो जोगडा, अर्ध नार अवतार*03
हे भगवान भोळीया ज्यारे ब्रह्माजी ये सृस्टी ने आगळ वधारवा आपनी अत्यंत तपस्या करी त्यारे तेमना तप ना फळ नी मागणी रुपे आपे सृस्टी मां नारी रुप ने प्रकटाववा तेमज नारी शक्ति नुं महत्व जगत ने समजाववा अर्धनारीश्वर अवतार लई तेमांथी शक्ति तत्व ने सृस्टी पर नारी रुप आप्यु आपना आ अर्धनारीश्वर अवतार ने मारा वंदन छे
*अयोनीज प्रगटेल ईश, शिलाडीन तप साथ*

*जरा मृत्यु जीत जोगडा, नंदीश्वर भये नाथ*04
हे भगवान निलकंठ ज्यारे शिलाडीन ऋषी जेवा ब्रह्मचारी ने पोतानो वंश चलाववा अयोनीज पुत्र माटे आपनी तपस्या करी अने तेने खेतर खेडतां आप स्वयंभूः रुपे भुमी मांथी पुत्र रुप प्रकट्या अने आनंद नो पार न रेहतां आप नुं नामाकरण नंदी करायुं..आम शिलाडीन ऋषी नुं नाम अमर करवा लीधेल आपना जरा अने मृत्यु ने जीतेल नंदिश्वर अवतार ने मारा वंदन छे.
*भरमा विष्णु भ्रांत को, जरा न पावत जीत*

*जग सरजक भय जोगडा, भैरव से भयभीत*05
हे भगवान महाकाळ ज्यारे ब्रह्मा अने विष्णु पण हुं मोटो ई भ्रांती नी भ्रमणा मां भरमाया त्यारे आपे क्रोधित थई भैरव अवतार धरी बंन्ने ने पोतानी स्थिति नुं भांन कराव्युं अने आंगळी ना नख थी बडबडी रहेल ब्रह्मा ना मस्तक ने छेदी नाखेल..आपना ए काशीपति काळ भैरव अवतार ने मारां वंदन छे.
*होय शस्त्र नव हाथ हण, क्रोध उपर रख काप*

*जन्म शिखावत जोगडा, अस्वस्त थामां आप*06
हे भगवान चंद्रमौली आपे अस्वस्थामा अवतार थी जगत ने जणांव्युं के हाथ मां हथीयार होय तो पण तेनो उपयोग निर्दोष ने हणवा माटे न करवो तथा क्रोध पर काबु राखवो अने अस्वस्थ न थवा नी शिख देता आपना अजर अमर अस्वस्थामा अवतार ने पण मारां वंदन छे.
*नाथ झपट नरसिंघ पर, पुंछ लपट कीय पार*

*जुक्या देव पद जोगडा,असो शरभ अवतार*07
हे भगवान त्रिपुरारी ज्यारे हरण्यकस्यप ने मारी भगवान नरसिंह नो क्रोध शांत नोहतो थतो त्यारे आपे अडधुं मृग नुं शरिर ने अडधुं सरभ पक्षी नुं आंम.शरभ अवतार थी नरसिंह ने पुंछडी मां लपेटी ने आकास मां उपाड्यो त्यां तेऩी छाती मां चांच मारी शांत नई पण नरसिंह ने भयभीत करी नाख्यो अने जगत ने क्रोध थी उगरवा सिख आपी तेवा आपना शरभ अवतार ने मारां वंदन छे.
*भग्त पाप सब भंजवा, कर्यो रुप कपीयान*

*जाळक लंका जोगडा, हर प्रकट्यो हनुमान*08
हे भगवान पिनांकपांणी आपे पोताना अनन्य भग्त रावण नां पाप बाळी देवा माटे लंका बाळवा कपीवर एवा हनुमान नो अवतार लीधो जेऩी कथा जग विदित छे एवा आपना हनुमान अवतार ने मारां वंदन छे.
*अनहद तपस्या से अयो, गुर्जर घर गुंणवान*

*जठराग्नि रुप जोगडा, गृहपति शंकर गान*09
हे भगवान करुणाकर सुचिस्मति अने विश्वनार ऋषी नी तपस्या थी प्रसन्न थई आपे तेमने त्यां गृहपति नामे अवतार धारण कर्यो जे जठराग्नी नुं बिजु रुप कही सकाय तेवो हतो ते गृहपति अवतार ने पण मारां वंदन छे.
*कियो क्रोध हर कामपर, रुद्र चुक्यो निज राह*

*जडधर जनम्यो जोगडा, दुरवाशा रुप दाह*10
हे भगवान अजन्मा शिव आप अत्री ने आश्रम जई पोतानी राह चुकी ने जमवा नुं पिरसणुं माग्युं तथा सती ना तपोबळे आप बाळक बन्या तथा माता अनसुया ने खोरडे दुर्वासा अवतार धर्यो अने क्रोध थी केवो विनास थाय छे तथा पोतानीज तपस्या ओछी थती जाय छे तेवि सिख जगत ने आपी ते आपना दुर्वासा अवतार ने मारां दंडवत प्रणांम सह वंदन छे.

*वृषभ बणी विष्णुतणो, विध्वस करीयो वंश*

*जई पाताळे जोगडा, अवतारी शीव अंश*11
हे भगवान कालातीत आपे विष्णु पुत्रो के जे पाताळ थी पृथ्वी सुधी विनास वेरी रह्या हता ते तमाम विष्णु ना वंश नो विध्वंस करवा वृषभ अवतार लई धर्म नुं रक्षण कर्युं छे आपना वृषभ अवतार ने मारां वंदन छे.
*भलो रख्यो ध्रम भीलडे, सद आतिथ सत्कार*

*जुक्यो शीव चीत जोगडा, यती नाथ अवतार*12
हे भगवान व्याघांम्बर ज्यारे आप आहुक भील ना त्यां रातवासा माटे यतिनाथ अवतार मां गयेल त्यारे आप ना आतिथ्य ना रक्षण हेतु ते भीले पोतानो धर्म बजावी जीव दिधेल..आपे आ रिते समाज ने आतिथी देवो भवः नुं सिक्षण आप्युं छे..आपना यतिनाथ अवतार ने मारां वंदन छे.
*गण गोकळ समजे गणां, सत्य करे नही सोध*

*जगन नभग पर जोगडा, कृष्ण द्रशन किय क्रोध*13
हे भगवान उमानाथ लोको तो आपना कृष्ण दर्शन अवतार ने एवुं समजे छे के तमे कृष्ण ने जोवा गोकुळ आव्या ते रुप.. पण सत्य तो ऐ छे के आप ज्यारे नभग ना यग्न वखते त्यां ऋषी कृष्ण(काळो वर्ण)दर्शन(देखावुं) एटले काळ पुरुष अवतार मां आवेल अने ते यग्न धन संपत थी क्षुधार्थु नुं जे कल्यांण करेल आपना ते कृष्ण दर्शन अवतार ने मारां वंदन छे.
*नवे खंड जाको नमे, भजे प्रेत अरु भूत*

*जुक्यो सचीपत जोगडा, अवतारी अवधूत*14
हे भगवान पशुपति नवेखंड धरती आपने नमे छे भुत प्रेत आदी आपने भजे छे तथा आपना अवधुत अवतार ने ओळख्या सिवाय ईन्द्रये वज्र नो घा करवा हाथ उंचो कर्यो अने त्यां ने त्यां थीर थयो पछी आप नी स्तुतीयो करी ने मांड छुट्यो, आपे जे एने शक्ति नुं अभिमान न करवा सिखव्युं ते आपना अवधुत अवतार ने मारां वंदन छे.
*सतरथ ना संतान कज, प्रकट विदभ पहचान*

*जीव जीवाड्यो जोगडा, भिक्षुक थई भगवान*15
हे भगवान अनाथो नाथ तमे विदर्भ देस ना राजा सत्यरथ ना पराजय पछी तेनी भटकती राजराणी पोताना पुत्र ने पांणी पिवडाववा सरोवर पासे गई अने मगर नो सिकार बनी त्यारे एक भिक्षुक तरिके त्यां आवेल अने ते बाळक ने बचावी ते मोटो थया पछी तेनी सहाय करी तेने पाछो जीताड्यो आम आप अनाथ ना पण नाथ होवानुं जगत ने जणांव्युं तेवा आपना भिक्षुक अवतार ने मारां वंदन छे.
*भ्रम भेटण कज भग्तनो, जब अकळायो जीव*

*जंगल प्रकट्यो जोगडा, सुरेश्वरा रुप शीव*16
हे भगवान महेश्वर ज्यारे व्याघ्रपद नो पुत्र उपमन्यु आपनी जंगल मां उपासना करतो हतो त्यारे आपे सुरेश्वर रुपे शीव ने न केहवाना शब्दो कहेल..तेनाथी क्रोधीत थयेल उपमन्यु आपनी सामे थयो त्यारे आपे पोते शंकरावतार होवानुं कही दर्शन आपेल अने तेने क्षीर सागर जेवा अनश्वर सागर नुं आधीपत्य आप्युं जे दुध नो समुद्र होवानुं पुराणो कहे छे..तेवा आपना सुरेश्वर अवतार ने मारां वंदन छे.
*दियां शस्त्र अरजून द्रढ,परख करी पशुपात*

*जय आशिस दिय जोगडा, कौरव ध्वंस किरात*17
हे भगवान भालचंद्र आपे अर्जुन ने कौरव विरुद्ध लडवा अस्त्र सस्त्र प्रदान कर्यां ते पेहला तेनी सामे किरात ना रुपे पधारी तेनी साथे युद्ध कर्युं अने जगत ने समजाव्युं के देवाता दान माटे पात्र योग्य छे के नही तेनी परख करी ने आपवु आम अनहद सिक्षा ना गुरु तेवा आपना किरात अवतार ने मारां वंदन छे.
*तोड सके ना तणखलुं, दैव बन्या हिंण दैव*

*जदे यक्ष बण जोगडा, मद त्रौडत महादैव*18
हे भगवान महादेव ज्यारे आपे विस पिधु अने देवो बधा अमरत पिधा ना मदमां आव्या त्यारे यक्ष ना रुपे आप आवी तणखलु तोडवा सौने कह्युं पण कोयथी एक तणखलुंय तुट्युं नई..अंते आकासवांणी  थई अने आप महादेव होवानुं सौने जांणमा आवता बधा करबंधी आपनी प्रार्थना करवा लाग्या आम हे मद तोडनार महादेव आपना यक्ष अवतार ने मारां वंदन छे.
*शंभु गिरिश भव थांणु शिव, सदा शिव हर सर्व*

*जपत कपालीय जोगडा, गंज पिनाकीन गर्व*19
हे भगवान गंगाधर जेनी जटामां थी निकळतुं जळ जो पाप मुक्त करी देतुं होय तो आपना अवतारो नो उल्लेख करनार ना तो भवोभव नां पाप प्रजळी जाय

हे भगवान रुद्र आपना तमाम अवतारो मां दस रुद्र अवतार तरीके.. 1.शंभु, 2.गिरिश,3.भव,4.स्थांणुं,5.शिव,6.सदाशिव,7.हर,8.सर्व,9.कपाली,अने 10पिनाकी एम पण पुरांणो मां वर्णवाया छे…आपना तमाम रुद्र अवतारो ने मारां वंदन छे.

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