उस ऐतिहासिक लम्हे को यादगार बनाने के लिए 11 मई को राष्ट्रीय तकनीकी दिवस के तौर पर मनाया जाता है.

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साल 1998 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने आज ही के दिन राजस्थान के पोकरण में परमाणु परीक्षण कर दुनिया को चौंका दिया था। भारत ने पहला परमाणु परीक्षण पोखरण 1 1974 में स्वर्गाय इंदिरा गांधी के शासनकाल मे किया था, जिसका नाम था ‘स्माइलिंग बुद्धा’।

परमाणु शक्ति संपन्न देश बनने कि दिशा में यह पहला प्रयास था। हालांकि, भारत को अधिक सफला मिली पोखरण-2 परीक्षण के बाद, जिसने भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देशों की सूची में ला खड़ा किया। देश का पहला परमाणु परीक्षण, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्ध 18 मई 1974 को हुआ. जिसके साथ, भारत न्यूक्लियर क्लब में शामिल होने वाला छठा देश बन गया. इन परीक्षणों की सबसे खास और दिलचस्प बात थी- जिस तरह CIA के जासूस उपग्रहों को छकाया गया. ये सैटेलाइट, भारत के किसी भी टेस्ट को पकड़ नहीं पाए.

DRDO अधिकारियों ने पता लगाया कि CIA के सैटेलाइट कब-कब भारत पर नजर रखते हैं. इसी के हिसाब से ज्यादातर रात को काम किया गया ताकि पकड़े जाने की संभावना कम से कम हो. वैज्ञानिक, आर्मी की वर्दी में काम करते थे. थोड़े भी मोटे वैज्ञानिकों को मिशन से हटा दिया गया ताकि वो सेना के फिट जवानों के बीच पहचाने न जा सकें. हर वैज्ञानिक को एक कोड नेम दिया गया. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का नाम था-मेजर जनरल पृथ्वीराज.

ज्ञातब्य है कि पाकिस्तान बलूचिस्तान की चगाई पहाड़ियों के पास परमाणु परीक्षण करता है उसके मुकाबले भारत के पास पोखरण में छिपकर सीक्रेट मिशन को पूरा करने के लिए साधन बहुत कम हैं, थोड़ी बहुत कटीली झाड़ियां जो पोखरण में उगी भी हुई हैं उनकी भी लंबाई बस कंधे तक है ऐसी दशाओं में भारत के लिए बिना किसी की नजर में आये परमाणु परीक्षण करना किसी बड़ी चुनौती से कम नही था

भारतीय सेना की 58 इंजीनियर रेजीमेंट को इस काम के लिए चुना गया था इस रेजीमेंट के कमांडेंट थे कर्नल गोपाल कौशिक इनके संरक्षण में ही भारत के परमाणु हथियारों का परीक्षण किया जाना था उन्हें इस मिशन को सीक्रेट रखने का काम भी सौंपा गया था ये इंजीनियर 18 महीने तक इस मिशन पर गुप्त तरीके से काम करते रहे भूतपूर्व राष्ट्रपति श्री एपीजे अब्दुल कलाम और उस समय परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष आर. चिदंबरम इस मिशन में शामिल दो बड़े वैज्ञानिक नाम थे l इस मिशन में कुल 80 वैज्ञानिक; रक्षा अनुसन्धान और विकास संगठन (DRDO) तथा परमाणु ऊर्जा आयोग से सम्बंधित थे .

पहले के तीन परीक्षण 11 मई को 3 बजकर 45 मिनट पर किए गए। जबकि, 12 मई को बाकी दो परीक्षण हुए। यह परीक्षण विदेश सचिव के. रघुनाथ की तरफ से अपने अमेरिकी समकक्षीय को यह भरोसा देने के बावजूद किया गया कि भारत की परमाणु परीक्षण करने का ऐसा कोई इरादा नहीं है। मानसिंह ने याद करते हुए कहा- “यह परीक्षण पूरी तरह से गुप्त था। सिर्फ पांच लोग ही इस बारे में जानते थे। जाहिर तौर पर मैं या फिर विदेश सचिव उन पांचों में शामिल नहीं थे।”

उस ऐतिहासिक लम्हे को यादगार बनाने के लिए 11 मई को राष्ट्रीय तकनीकी दिवस के तौर पर मनाया जाता है.

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